आरबीआई की पहल: बैंकिंग क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए उठाए गए कदम
आरबीआई द्वारा 79,526 करोड़ की अतिरिक्त नकदी का प्रवाह
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग क्षेत्र में तरलता और स्थिरता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल के समय में, आरबीआई ने गिरते रुपए को सहारा देने के लिए एक रात की अवधि वाली वेरिएबल रेट रेपो (वीआरआर) नीलामी के माध्यम से 79,256 करोड़ की अतिरिक्त नकदी बैंकिंग प्रणाली में डाली है। यह कदम बाजार में नकदी के प्रवाह को बनाए रखने और रुपए की स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
वेरिएबल रेट रेपो प्रणाली का महत्व
वेरिएबल रेट रेपो एक मौद्रिक नीति उपकरण है, जिसके तहत आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में, बैंक सरकारी प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर आरबीआई से नकदी उधार लेते हैं। इस नीलामी की विशेषता यह है कि इसमें ब्याज दर बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती है।
बैंकिंग प्रणाली की वर्तमान स्थिति
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 23 मार्च तक बैंकिंग प्रणाली में लगभग 65,395.64 करोड़ की तरलता की कमी का अनुमान लगाया गया था। इस कमी को पूरा करने के लिए आरबीआई ने यह कदम उठाया है। यह सुनिश्चित करता है कि बैंकों के पास ऋण देने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए पर्याप्त नकदी बनी रहे।
रुपये की गिरावट का कारण
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। हाल ही में, रुपये में गिरावट पश्चिम एशिया में तनाव के कारण बढ़ी है। सोमवार को, रुपये ने 94 का आंकड़ा पार किया और अंत में 50 पैसे की गिरावट के साथ 94.03 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी फंड का बहिर्वाह रुपये की कमजोरी का मुख्य कारण हैं।
