आशा वर्कर्स का करनाल में महापड़ाव: 8 दिसंबर को उठाएंगे आवाज़
आशा वर्कर्स की बैठकें और मांगें
जींद में अलेवा और निडाना पीएचसी में आशा वर्कर्स और फैसिलिटेटरों की बैठकें आयोजित की गईं। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 8 दिसंबर को करनाल में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के कार्यालय के सामने होने वाले राज्य स्तरीय महापड़ाव में बड़ी संख्या में भाग लिया जाएगा। यह महापड़ाव भाजपा सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों और आशा वर्कर्स की लंबित मांगों के खिलाफ होगा।
आशा वर्कर्स ने कहा कि सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है। पिछले दो वर्षों से उन्हें कोई रजिस्टर नहीं मिला है, जिससे वे अपनी गतिविधियों को दर्ज कर सकें। इसके लिए उन्हें अपनी जेब से रजिस्टर खरीदने पड़ रहे हैं, जिसका कोई मुआवजा नहीं मिल रहा।
महापड़ाव का उद्देश्य
आशा वर्कर्स का कहना है कि मार्च 2025 में घोषित वेतन वृद्धि अब तक लागू नहीं हुई है। बजट में कटौती, बकाया मानदेय का न मिलना और डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब चुप रहने का समय खत्म हो चुका है और 8 दिसंबर का महापड़ाव इस अन्याय का निर्णायक जवाब होगा।
महापड़ाव की तैयारियों के तहत पीएचसी स्तर पर बैठकों का सिलसिला जारी है। उनकी मांग है कि चारों लेबर कोड्स को तुरंत रद्द किया जाए और पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए।
आवश्यक मांगें
आशा वर्कर्स और फैसिलिटेटरों का न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपये करने, सभी को स्थायी कर्मचारी बनाने, और पेंशन, ग्रेच्युटी, एक्सग्रेशिया जैसे सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की मांग की गई है।
इसके अलावा, मार्च 2025 में घोषित वेतन वृद्धि को तुरंत लागू करने और बकाया मानदेय जारी करने की भी मांग की गई है। उन्होंने परियोजनाओं के निजीकरण को रोकने और पर्याप्त बजट आवंटन की भी आवश्यकता जताई है।
