आसनसोल में कोयला खदान हादसा: अवैध खनन के चलते कई मजदूरों की जान गई
आसनसोल में दर्दनाक खनन हादसा
आसनसोल: पश्चिम बंगाल के आसनसोल से एक दुखद घटना की सूचना मिली है, जहां मंगलवार सुबह एक कोयला खदान के ढहने से अवैध खनन में लगे कई श्रमिक मलबे में दब गए। यह दुर्घटना पश्चिम बर्दवान जिले के कुल्टी थाना क्षेत्र के बारिरा इलाके में हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
अवैध खनन की सुरक्षा खामियां उजागर
सरकारी स्वामित्व वाली भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की खदान में हुई इस घटना ने अवैध खनन और उससे जुड़ी सुरक्षा खामियों को एक बार फिर से उजागर किया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, पांच श्रमिक फंसे थे, जिनमें से दो को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि तीन की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
मलबे में दबे श्रमिकों की खोज
यह घटना मंगलवार सुबह लगभग 7:45 बजे हुई, जब श्रमिक अवैध तरीके से कोयला निकालने के लिए खदान में प्रवेश कर रहे थे। अचानक सुरंग का एक हिस्सा धंस गया और श्रमिक उसके नीचे दब गए। इसके तुरंत बाद, स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़ पड़े और अफरा-तफरी मच गई।
बचाव अभियान में निकाले गए शव
घटना की जानकारी मिलते ही बीसीसीएल के अधिकारी, पुलिस और भारी मशीनरी के साथ बचाव कार्य शुरू किया गया। जेसीबी मशीनों की सहायता से मलबा हटाया गया और फंसे हुए लोगों को निकालने का प्रयास किया गया।
भाजपा विधायक अजय पोद्दार ने बताया कि पहले पांच लोग फंसे थे, जिनमें से दो को सुरक्षित निकाला गया, जबकि बाद में तीन शव बरामद किए गए। दो घायलों को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
पश्चिम बर्दवान के जिला मजिस्ट्रेट पोन्नमबलम एस ने घटना पर कहा, "घटनास्थल की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद हम और जानकारी प्रदान करेंगे।"
कोयला माफिया पर गंभीर आरोप
इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। भाजपा विधायक अजय पोद्दार ने पुलिस, केंद्रीय बलों और कोयला माफियाओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "वे रैटहोल से कोयला निकाल रहे थे। यह एक साम्राज्य है। केंद्रीय बल, पुलिस और माफिया इसमें शामिल हैं। ग्रामीण ही मर रहे हैं। यह पूरे बंगाल में फैला हुआ है।"
स्थानीय लोगों का गुस्सा
हादसे के बाद कुल्टी और आसपास के गांवों में शोक का माहौल है। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि खदान अधिकारियों और CISF को अवैध घुसपैठ की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कई गरीब परिवार रोज़ी-रोटी के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर कोयले के टुकड़े निकालने को मजबूर हैं, जिससे ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं।
पिछले हादसों की याद
यह घटना उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 15 नवंबर 2025 को हुई खदान दुर्घटना की याद दिलाती है, जहां कई श्रमिक फंसे थे और सात लोगों की मौत हो गई थी। तब भी विशाल चट्टानों के कारण बचाव अभियान में भारी दिक्कतें आई थीं, जो खनन सुरक्षा की बड़ी चूक को उजागर करता है।
