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इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों की संख्या पर विवाद

इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी पीने से हुई मौतों की संख्या को लेकर विवाद बढ़ गया है। जबकि मृतकों के परिवारों और अस्पतालों की रिपोर्ट 15 मौतों की पुष्टि करती है, राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को केवल चार मौतों की जानकारी दी है। इस मामले में अदालत ने साफ पानी की आपूर्ति का आदेश दिया है। जानें इस गंभीर मुद्दे पर और क्या हो रहा है, और राज्य सरकार की कार्रवाई के बारे में।
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इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों की संख्या पर विवाद

मौतों की संख्या पर असहमति

भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीला पानी पीने से कितने लोगों की जान गई है? मृतकों के परिवारों की बातों, अस्पतालों की रिपोर्ट और मीडिया में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार की शाम तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को सूचित किया कि केवल चार लोगों की मृत्यु हुई है। इसके साथ ही, यह भी बताया गया कि 200 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 35 की हालत गंभीर है। एक वकील ने अदालत में कहा कि याचिका दायर करने के दिन तक 11 लोगों की मौत हो चुकी थी और उनकी तस्वीरें भी मीडिया में दिखाई गई थीं।


सरकार की रिपोर्ट और अदालत का निर्देश

हालांकि, खबरों के अनुसार, दूषित पानी पीने से 15वीं मौत शुक्रवार को हुई। गुरुवार तक 14 मौतों की पुष्टि हो चुकी थी। मृतकों के परिवारों और अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, 15 मौतों की पुष्टि की जा रही है। सरकार ने दो जनवरी को सुनवाई में मरने वालों की संख्या चार बताई और उनके नाम भी साझा किए। इस मामले की अगली सुनवाई छह जनवरी को होगी। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने एक जनवरी को राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। अदालत ने दो जनवरी को तत्काल साफ पानी की आपूर्ति का आदेश भी दिया।


राज्य सरकार की कार्रवाई

दूषित पानी से हुई मौतों की घटनाओं के पांच दिन बाद, सरकार ने चार मौतों की पुष्टि की। इस बीच, राज्य की मोहन यादव सरकार ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और अतिरिक्त कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही, सिसोनिया का तबादला भी किया गया है। प्रभारी सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण विभाग का प्रभार भी वापस ले लिया गया है।


स्वास्थ्य अधिकारियों की रिपोर्ट

राज्य सरकार ने स्थिति रिपोर्ट में बताया है कि दूषित पानी से चार वरिष्ठ नागरिकों की मृत्यु हुई है, जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है। सबसे पहले 28 दिसंबर को उर्मिला की मौत हुई। इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। सैंपल में फीकल कॉलिफॉर्म, ई कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। हालांकि, सरकार इसे प्रारंभिक रिपोर्ट बताकर खारिज कर रही है। नगर निगम द्वारा भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। राज्य के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों ने माना है कि पीने के पानी में सीवर का पानी मिल गया था, जिससे पानी दूषित हुआ और लोगों की जान गई।