इजराइली सेना ने पत्रकारों के साथ बदसलूकी पर बटालियन को किया सस्पेंड
इजराइली सेना का सख्त कदम
वेस्ट बैंक में पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और उनकी गिरफ्तारी के मामले में इजराइली सेना ने कठोर कार्रवाई की है। आईडीएफ ने सोमवार को पूरी बटालियन को निलंबित कर दिया और रिजर्व बटालियन की गतिविधियों पर रोक लगा दी है।
यह बटालियन नेत्जाह यूनिट का हिस्सा है। सेना ने बताया कि बटालियन को तुरंत वेस्ट बैंक से हटा कर प्रशिक्षण पर भेजा गया है, और जांच पूरी होने तक इसे किसी भी ऑपरेशन में शामिल नहीं किया जाएगा। बटालियन को पेशेवर और नैतिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, और इस मामले में शामिल सैनिकों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की जाएगी।
आईडीएफ ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इसकी पुष्टि की। बताया गया कि चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ इयाल जमीर ने जूडिया और सामरिया क्षेत्र में एक चौकी को खाली कराने के दौरान पत्रकारों के साथ आईडीएफ सैनिकों के व्यवहार की जांच की।
इयाल जमीर ने स्वीकार किया कि निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जांच में रिपोर्टरों के साथ सैनिकों के व्यवहार में कई खामियां पाई गईं। इसके अलावा, व्यवहार के नियमों में कमी, आईडीएफ के आदेशों से भटकाव, और प्रेस के सदस्यों के साथ गलत तरीके से संवाद स्थापित करने के मामले सामने आए।
इयाल जमीर ने सफाई देते हुए कहा कि आईडीएफ क्षेत्र में प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करता है और इस घटना पर खेद व्यक्त करता है, इसलिए बटालियन की ऑपरेशनल तैनाती को निलंबित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह एक गंभीर नैतिक घटना है जो आईडीएफ के नियमों और मूल्यों के खिलाफ है। हम सभी ने सैनिक के रूप में कसम खाई थी कि हथियारों का उपयोग केवल मिशन को पूरा करने के लिए किया जाएगा, प्रतिशोध के लिए नहीं। हम आईडीएफ में ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते सीएनएन की रिपोर्टिंग टीम के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। आरोप है कि 26 मार्च को वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव तयासिर में सैनिकों ने टीम को हिरासत में लिया। इसके अलावा, एक फोटो जर्नलिस्ट सिरिल थियोफिलॉस के साथ मारपीट की गई, जिससे उसका कैमरा टूट गया। यह टीम हाल ही में इजरायली सेटलर्स द्वारा किए गए हमले की रिपोर्टिंग कर रही थी।
बदसलूकी की इस घटना की अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (एफपीए) ने आलोचना की है। संगठन ने इसे हिंसक बताते हुए प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया।
संगठन ने आरोप लगाया कि सैनिकों ने पत्रकारों और वहां मौजूद लोगों पर बंदूक तान दी, जबकि पत्रकार अपनी पहचान बता चुके थे। इस सबके बीच बढ़ते दबाव के चलते आईडीएफ ने सोमवार को अपनी सफाई पेश की।
