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इजरायल का बड़ा कदम: संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों से संबंध समाप्त

इजरायल ने अमेरिका के बाद कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से संबंध समाप्त करने का बड़ा निर्णय लिया है। विदेश मंत्री गिदोन सार ने इन संगठनों पर पक्षपात और इजरायल-विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। इस कदम ने वैश्विक राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। इजरायल का कहना है कि निष्पक्षता का दावा करने वाले संगठनों के साथ सहयोग जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। जानें इस फैसले के पीछे की वजहें और आगे की संभावनाएं।
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इजरायल का बड़ा कदम: संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों से संबंध समाप्त

इजरायल का नया निर्णय

नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हटने के निर्णय के बाद, वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ गई है। इजरायल ने भी इसी दिशा में कदम उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सभी संबंध समाप्त करने की घोषणा की है। यह निर्णय इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार द्वारा लिया गया है, जिन्होंने इन संगठनों पर पक्षपात और इजरायल-विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दिया है।


पक्षपात का आरोप

इजरायल के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले की जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के हालिया निर्णय के बाद संबंधित संगठनों की समीक्षा की गई और अनुभव के आधार पर यह कदम उठाया गया।


संपर्क समाप्त करने के निर्देश

विदेश मंत्री गिदोन सार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित एजेंसियों के साथ सभी संपर्क तुरंत समाप्त करें। इसके साथ ही अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग की समीक्षा भी की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ, तो संबंधित सरकारी मंत्रालयों से परामर्श लिया जाएगा।


कौन-कौन सी एजेंसियों से तोड़े गए संबंध

इजरायल ने पहले ही चार संयुक्त राष्ट्र निकायों से संबंध समाप्त कर लिए हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि का कार्यालय भी शामिल है, जो सशस्त्र संघर्ष में बच्चों के अधिकारों पर कार्य करता है। इजरायल का आरोप है कि इस कार्यालय ने 2024 में इजराइली रक्षा बल (आईडीएफ) को ब्लैकलिस्ट किया था।


अन्य एजेंसियों पर आरोप

यूएन विमेन, जो महिलाओं की समानता और सशक्तिकरण के लिए कार्य करती है, पर इजरायल का आरोप है कि इसने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायली महिलाओं के साथ हुई यौन हिंसा की घटनाओं को नजरअंदाज किया। इजरायल के अनुसार, यह चुप्पी उसके लिए बेहद पीड़ादायक रही।


भविष्य के निर्णय

विदेश मंत्री सार ने स्पष्ट किया है कि अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग की भी गहन समीक्षा की जाएगी। इस प्रक्रिया के बाद और कड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। इजरायल का कहना है कि जो संगठन निष्पक्षता का दावा करते हुए पक्षपात करते हैं, उनके साथ सहयोग जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। यह कदम वैश्विक राजनीति में इजरायल की स्वतंत्र नीति और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।