इलाहाबाद हाई कोर्ट का लिव-इन रिलेशनशिप पर महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट का निर्णय
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि यदि दो वयस्क आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा, भले ही इनमें से कोई एक पहले से विवाहित हो। अदालत ने यह भी कहा कि समाज की नैतिकता कानून पर हावी नहीं हो सकती। हालांकि, अदालत ने चेतावनी दी है कि बिना तलाक के लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर पार्टनर को कानूनी सुरक्षा प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।
डेटिंग की दुनिया में अब 'Truecasting' का नया ट्रेंड उभर रहा है। सूत्रों के अनुसार, 2026 में सिंगल्स की प्रोफाइल में 100 प्रतिशत ईमानदारी देखने को मिल रही है, जिससे उन्हें सही साथी मिल सके। लोग अब अपनी असली पहचान को सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर चर्चाओं के अनुसार, शादी अब केवल एक पार्टनरशिप नहीं बल्कि एक 'बिजनेस डील' बनती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज के युवाओं में शादी को लेकर डर बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण मेट्रोपोलिटन शहरों में घर की मांग और उच्च आय की अपेक्षाएं हैं।
भविष्य में लिव-इन रिलेशनशिप को जनगणना 2027 में शामिल किया जा सकता है, जिसमें स्थिर संबंधों में रहने वाले जोड़ों को भी विवाहित के रूप में गिना जा सकता है। यह कदम पारंपरिक विवाह के प्रति बदलते सामाजिक दृष्टिकोण का संकेत है।
