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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है, जिसमें एक पीड़ित महिला के मोबाइल नंबर को तुरंत सक्रिय करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने पुलिस की एकतरफा कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और कहा कि सरकारी एजेंसियों की लापरवाही के कारण किसी भी नागरिक को परेशान नहीं किया जा सकता। इस मामले में पति की झूठी शिकायत के चलते महिला का नंबर ब्लॉक कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने पुलिस को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस और लखनऊ साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने लखनऊ पुलिस को निर्देश दिया है कि वे एक पीड़ित महिला के ब्लॉक किए गए मोबाइल नंबर को तुरंत सक्रिय करें। हाईकोर्ट ने पुलिस की इस एकतरफा कार्रवाई को 'गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया और कहा कि सरकारी एजेंसियों की लापरवाही के कारण किसी भी नागरिक को इस तरह से परेशान नहीं किया जा सकता।


पति की झूठी शिकायत पर कार्रवाई

एक प्रतिष्ठित लीगल न्यूज़ वेबसाइट के अनुसार, यह महत्वपूर्ण आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता महिला और उसके पति के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते पति ने साइबर सेल में झूठी शिकायत दर्ज कराई, जिसके परिणामस्वरूप लखनऊ पुलिस ने बिना किसी ठोस जांच के महिला का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया।


साइबर सेल प्रभारी के हलफनामे पर नाराजगी

सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने लखनऊ के साइबर सेल इंचार्ज द्वारा प्रस्तुत हलफनामे पर असंतोष व्यक्त किया। बेंच ने कहा कि यह स्पष्ट है कि मामला पति-पत्नी के बीच का है। साइबर सेल के प्रभारी द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में जो रुख अपनाया गया है, वह गैर-जिम्मेदाराना है। गृह मंत्रालय के आदेशों का इस तरह दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।


पुलिस को एक हफ्ते का अल्टीमेटम

हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस को आदेश दिया कि वे संबंधित टेलीकॉम कंपनी से संपर्क करें और महिला का नंबर तुरंत चालू करें। पुलिस को एक सप्ताह के भीतर अदालत में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अदालत ने महिला के पति को भी नोटिस जारी किया है, जिसमें पूछा गया है कि उसे पुलिस को गुमराह करने के लिए भारी जुर्माना क्यों न लगाया जाए।