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ईरान-अमेरिका युद्धविराम: जयराम रमेश ने मोदी सरकार की कूटनीति पर उठाए सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित युद्धविराम के बाद, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार की कूटनीति पर तीखी आलोचना की है। उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका को भारत के लिए कूटनीतिक झटका बताया और सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। रमेश ने यह भी कहा कि भारत की प्रतिक्रिया पश्चिम एशिया के तनावों पर स्पष्ट नहीं रही है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और रमेश के आरोपों के बारे में।
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ईरान-अमेरिका युद्धविराम: जयराम रमेश ने मोदी सरकार की कूटनीति पर उठाए सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की घोषणा

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच दो हफ्तों के लिए युद्धविराम की घोषणा की गई है, जिसे कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस युद्धविराम की जानकारी दी, जिसके तहत ईरान ने अस्थायी रूप से अपने सैन्य अभियानों को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने पर सहमति जताई है। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की मध्यस्थता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसने दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने में मदद की।


कांग्रेस का तीखा हमला

इस घटनाक्रम पर जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि इस युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका भारत के लिए एक कूटनीतिक झटका है। रमेश ने सरकार की 'विश्वगुरु' छवि पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह घटनाक्रम भारत की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर करता है। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रणनीति अपेक्षित प्रभाव नहीं डाल रही है।


पश्चिम एशिया में चुप्पी का आरोप

कांग्रेस नेता ने पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे तनाव और इज़राइल-गाजा मुद्दों पर भी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस संकट के दौरान भारत की ओर से कोई स्पष्ट और प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की छवि प्रभावित हो सकती है। रमेश ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की चुप्पी चिंता का विषय है, जबकि ऐसे समय में एक मजबूत कूटनीतिक रुख की आवश्यकता होती है।


पाकिस्तान नीति पर उठाए सवाल

रमेश ने पाकिस्तान के प्रति केंद्र सरकार की नीति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की रणनीति सफल नहीं हो रही है, क्योंकि मौजूदा युद्धविराम में उसकी भूमिका सामने आई है। उनके अनुसार, यह स्थिति भारत की कूटनीतिक रणनीति पर सवाल उठाती है और यह संकेत देती है कि क्षेत्रीय समीकरण बदल रहे हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।


‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए सवाल

इसके अलावा, जयराम रमेश ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने पूछा कि मई 2025 में इस ऑपरेशन को अचानक क्यों रोका गया और अब तक इस पर कोई स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पारदर्शिता जरूरी है, ताकि देश और जनता को सही स्थिति का पता चल सके।