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ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण

ईरान ने अमेरिका के साथ युद्धविराम पर बातचीत को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है, जिसमें पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान में अपनी मांगें प्रस्तुत की हैं और फिर से लौट आए हैं। इस बीच, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका से सीधे बातचीत नहीं करेगा। जानें इस वार्ता के पीछे की रणनीतियाँ और ईरान की शर्तें।
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ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण

ईरान की अमेरिका से बातचीत की नई पहल

नई दिल्ली। ईरान ने अमेरिका के साथ युद्धविराम पर बातचीत को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, जिन्होंने पाकिस्तान में वार्ता के बिंदु और अपनी मांगें प्रस्तुत की थीं, रविवार को फिर से पाकिस्तान लौट आए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे सकारात्मक संकेत माना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का अगला दौर कब शुरू होगा, क्योंकि अराघची का रूस जाने का कार्यक्रम है। इससे पहले, वे पाकिस्तान के नेताओं से मुलाकात करेंगे।


अराघची शुक्रवार की रात इस्लामाबाद पहुंचे थे और शनिवार को उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की, जिसमें उप प्रधानमंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसीम मुनीर भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि ईरान ने अपनी शर्तें और आपत्तियां पाकिस्तान को सौंप दी हैं। इसके बाद, अराघची ने ओमान की यात्रा की। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने ईरान द्वारा दिए गए दस्तावेज अमेरिका को सौंपे हैं, जिससे अराघची का पाकिस्तान लौटना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।


ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका से सीधे बातचीत नहीं करेगा और अपनी बात पाकिस्तान के माध्यम से ही पहुंचाएगा। इसी कारण, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर को पाकिस्तान नहीं भेजा। दोनों देशों के बीच बातचीत पाकिस्तान के जरिए होगी, और किसी समझौते पर पहुंचने के बाद ही दोनों नेता आमने-सामने बैठकर चर्चा करेंगे।


अराघची ने ओमान में सुल्तान तारिक बिन हैथम से मुलाकात की, जहां पश्चिम एशिया में युद्ध और शांति बहाली की कोशिशों पर चर्चा हुई। उन्होंने ओमान की कूटनीतिक भूमिका की सराहना की और कहा कि बातचीत के माध्यम से ही समाधान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की सैन्य मौजूदगी से क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ती है। ओमान के सुल्तान ने उम्मीद जताई कि युद्ध जल्द समाप्त होगा और क्षेत्र में शांति लौटेगी।


इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि तेहरान दबाव और धमकियों के बीच अमेरिका के साथ जबरन बातचीत नहीं करेगा। अमेरिकी मीडिया समूह ‘सीएनएन’ की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेशकियान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बातचीत में कहा कि अमेरिकी कदम भरोसे को कमजोर कर रहे हैं और बातचीत की प्रक्रिया को कठिन बना रहे हैं। उन्होंने जहाजों पर लगी नाकेबंदी हटाने को भी एक आवश्यक शर्त बताया।