Newzfatafatlogo

ईरान का अमेरिका पर बड़ा बयान: शर्तें थोपने की स्थिति में नहीं

पश्चिम एशिया में स्थायी युद्धविराम के प्रयासों के बीच, ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह अब किसी देश पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकता। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान पहुंचे हैं, जबकि ईरान ने अमेरिका को होर्मुज की खाड़ी खोलने का नया प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में अमेरिका से समुद्री नाकेबंदी हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने की मांग की गई है। जानें इस जटिल स्थिति में अमेरिका की प्रतिक्रिया और ईरान के रुख के बारे में।
 | 
ईरान का अमेरिका पर बड़ा बयान: शर्तें थोपने की स्थिति में नहीं

ईरान का अमेरिका के प्रति कड़ा रुख

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में स्थायी युद्धविराम की कोशिशों के बीच, ईरान ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका अब किसी देश पर अपनी शर्तें थोपने की स्थिति में नहीं है। मंगलवार को ईरान ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब यह नहीं बता सकता कि अन्य देशों को क्या करना चाहिए। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक बार फिर पाकिस्तान पहुंचे हैं। वे रूस की यात्रा के बाद इस्लामाबाद में तीन दिन में तीसरी बार आए हैं।


ईरान का अमेरिका को चेतावनी

ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तलाएई निक ने सरकारी टीवी पर बातचीत करते हुए कहा कि ईरान ट्रंप के दबाव को सहन नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अपनी गलत मांगों को छोड़ना होगा। ईरान ने अमेरिका को होर्मुज की खाड़ी खोलने का एक नया प्रस्ताव दिया है, जिस पर अमेरिका विचार कर रहा है। वर्तमान में, अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत में अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।


ईरान का नया प्रस्ताव

ईरान ने पहली बार होर्मुज की खाड़ी खोलने का प्रस्ताव दिया है और अमेरिका से समुद्री नाकेबंदी हटाने की अपील की है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने अमेरिका को बातचीत के लिए एक नया प्रस्ताव दिया था, जिसमें तीन मुख्य शर्तें थीं। पहली, अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे युद्ध का अंत और भविष्य में हमले की गारंटी। दूसरी, अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी का हटना, होर्मुज का खुलना और जहाजों की आवाजाही का फिर से शुरू होना। तीसरी शर्त, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे विवादित मुद्दों पर चर्चा करना।


ट्रंप का प्रस्ताव ठुकराना

रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। अमेरिकी मीडिया समूह 'सीएनएन' के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यदि बिना परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को सुलझाए होर्मुज की खाड़ी खोली गई, तो बातचीत में अमेरिका की स्थिति कमजोर हो जाएगी। इसलिए, दोनों मुद्दों का समाधान एक साथ होना चाहिए। यह ध्यान देने योग्य है कि ट्रंप ने दो दिन में दूसरी बार ईरान के प्रस्ताव को ठुकराया है।


परमाणु कार्यक्रम पर सहमति की कमी

पिछले कुछ दिनों से ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के माध्यम से प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिका चाहता था कि ईरान 20 वर्षों तक अपने परमाणु कार्यक्रम को रोक दे और उसके पास मौजूद 440 किलो संवर्धित यूरेनियम सौंप दे। ईरान ने इन मांगों को अत्यधिक और अनुचित बताते हुए मानने से इनकार कर दिया। इस बीच, फ्रांस ने कहा है कि यदि युद्ध समाप्त करना है, तो ईरान को बड़े समझौते करने होंगे और अपने रुख में बदलाव लाना होगा। हालांकि, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि अमेरिका के सामने ईरान कमजोर दिख रहा है और उन्होंने वॉशिंगटन की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।