Newzfatafatlogo

ईरान का विवादास्पद निर्णय: 12 साल के बच्चों को युद्ध में शामिल करने की तैयारी

ईरान ने एक विवादास्पद निर्णय लेते हुए 12 साल के बच्चों को युद्ध में शामिल करने की योजना बनाई है। इस निर्णय ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में हड़कंप मचा दिया है। आईआरजीसी के अधिकारी ने बताया कि बच्चों को युद्ध कार्यों में शामिल करने के लिए ‘फॉर ईरान’ नामक पहल शुरू की गई है। यह कदम पुराने सैन्य नियमों का उल्लंघन करता है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। जानें इस निर्णय के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव।
 | 
ईरान का विवादास्पद निर्णय: 12 साल के बच्चों को युद्ध में शामिल करने की तैयारी

नई दिल्ली में ईरान का नया आदेश

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच, ईरान ने एक चौंकाने वाला निर्णय लिया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने अब 12 साल के बच्चों को युद्ध में शामिल करने की योजना बनाई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ये बच्चे अब युद्ध से संबंधित खतरनाक कार्यों में भाग ले सकेंगे, जिससे मानवाधिकार संगठनों में हड़कंप मच गया है।


‘फॉर ईरान’ पहल के तहत बच्चों का उपयोग

ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी रहीम नदाली ने इस बात की पुष्टि की है कि बच्चों को युद्ध कार्यों में शामिल करने के लिए ‘फॉर ईरान’ नामक एक नई पहल शुरू की गई है। इस योजना के तहत, 12 साल के बच्चे पेट्रोलिंग, चेकपॉइंट्स की देखरेख और सैन्य सामग्री की आपूर्ति जैसे जोखिम भरे कार्यों में लगाए जाएंगे। नदाली ने इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि बच्चे स्वयं युद्ध में शामिल होने की इच्छा व्यक्त कर रहे थे, इसलिए उम्र की सीमा को घटाकर 12 साल किया गया है।


पुराने नियमों का उल्लंघन

ईरान के इस नए आदेश ने सैन्य सेवा से जुड़े सभी पुराने नियमों को दरकिनार कर दिया है। पहले, ईरान की नियमित सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में शामिल होने के लिए न्यूनतम उम्र 18 वर्ष थी। वहीं, पैरामिलिट्री फोर्स ‘बसीज’ में स्वयंसेवक के रूप में शामिल होने के लिए 15 वर्ष की उम्र आवश्यक थी। अब इस नए निर्णय ने युद्ध से जुड़े सहायक कार्यों के लिए उम्र की सीमा को 12 वर्ष कर दिया है।


अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन

ईरान के इस कदम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि यह ‘कन्वेंशन ऑन द राइट्स ऑफ द चाइल्ड’ के नियमों का उल्लंघन है। पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने इस निर्णय को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि बच्चों को किसी भी सैन्य कार्य में शामिल करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। उन्होंने 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध के दौरान बच्चों के ब्रेनवॉश करने की याद दिलाई, जब 12 साल के बच्चों को ‘बसीज’ में भर्ती किया गया था।