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ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की प्रभावशीलता पर नई रिपोर्ट

एक अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की अधिकांश बैलिस्टिक मिसाइलें युद्ध में प्रभावी नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान की मध्यम दूरी की मिसाइलें कमजोर हो गई हैं, जबकि छोटी दूरी की मिसाइलें लगातार हमले कर रही हैं। ईरानी सेनाओं में अमेरिकी-इजरायली हमलों के कारण डर का माहौल है, जिससे उनकी युद्ध क्षमता प्रभावित हो रही है।
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ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की प्रभावशीलता पर नई रिपोर्ट

ईरान की मिसाइल क्षमता पर चिंता

नई दिल्ली। एक अमेरिकी थिंक टैंक, इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर, ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि ईरान की अधिकांश बैलिस्टिक मिसाइलें युद्ध में प्रभावी नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भले ही ईरान के पास 50 प्रतिशत लॉन्चर कार्यशील हों, लेकिन वे अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में असमर्थ हैं। इस समय, ईरान ने इज़रायल के बुनियादी ढांचे और पश्चिम एशिया में अमेरिकी संपत्तियों पर ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग किया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईरान के 50 प्रतिशत मिसाइल लॉन्चर अभी भी सही स्थिति में हैं, लेकिन जब कोई लॉन्चर अपने मिशन को पूरा नहीं कर पाता, तो वह युद्ध में बेअसर हो जाता है।


थिंक टैंक ने यह भी बताया कि ईरान की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें काफी कमजोर हो गई हैं, जबकि छोटी दूरी की मिसाइलों ने लगातार हमले किए हैं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि ईरान के मिसाइल खतरों का सही आकलन करने के लिए विभिन्न प्रकार की मिसाइलों के बीच अंतर करना आवश्यक है। संयुक्त सेना ने कई ईरानी मिसाइल लॉन्चरों को युद्ध में बेअसर कर दिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ये लॉन्चर मध्यम या छोटी दूरी की प्रणालियों के लिए हैं।


ईरान की मिसाइल दागने की दर से यह स्पष्ट होता है कि उसकी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल सेना कमजोर हो गई है। छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें लगातार हमले कर रही हैं, लेकिन उनकी स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। पॉलिसी रिसर्च सेंटर ने यह भी बताया कि 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों ने ईरानी सेनाओं में व्यापक डर पैदा किया है, जिसके कारण 20 मार्च से मिसाइल हमलों में कमी आई है। रिपोर्ट में ईरानी सशस्त्र बलों के बीच भर्ती और सैनिकों को बनाए रखने में समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है। थिंक टैंक ने कहा कि अमेरिकी-इजरायली हमलों, विशेषकर नेतृत्व को निशाना बनाने वाले हमलों ने एक ऐसा डर पैदा किया है, जिसके कारण ईरानी सेनाएं अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दे सकती हैं, जिससे उनके मिशन को पूरा करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।