ईरान के खिलाफ इजराइल की कार्रवाई: नेतन्याहू का बयान
इजराइल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई
इजराइल के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ ईरान पर कार्रवाई को वैश्विक संघर्ष बताया
West Asia Crisis: तेल अवीव में, अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध की शुरुआत की। पहले दिन ही, इन दोनों ने ईरान के सर्वोच्च नेता और कई सैन्य अधिकारियों को मार गिराया। हालांकि, ईरान ने मजबूती से जवाब दिया और संघर्ष को जारी रखा।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक साक्षात्कार में कहा कि यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद है, यह बताते हुए कि ईरान एक बड़ा खतरा बन चुका था। उन्होंने कहा कि अगर इजराइल और अमेरिका ने हाल ही में कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान कुछ ही महीनों में परमाणु बम बना सकता था।
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास में लगा हुआ था।
ईरान का विनाशकारी प्रयास
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान एक ऐसा देश है जो खुले तौर पर अमेरिका और इजराइल के विनाश की बात करता है। उनके अनुसार, ईरान की मिसाइल क्षमता भविष्य में अमेरिका पर हमला करने की स्थिति में पहुंच सकती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी शासन का कमजोर होना हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों को भी प्रभावित करेगा। ये सभी संगठन ईरान के समर्थन पर निर्भर हैं, और अगर तेहरान कमजोर होता है, तो उनकी ताकत भी घटेगी।
नेतन्याहू ने दावा किया कि युद्ध से पहले हिजबुल्लाह के पास लगभग डेढ़ लाख मिसाइलें और रॉकेट थे, जिनमें से 90% से अधिक को इजराइल ने नष्ट कर दिया है, लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
ईरान की अर्थव्यवस्था और इजराइल की रणनीति
सोशल मीडिया और अमेरिका में इजराइल की छवि पर पूछे गए सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि कई विदेशी ताकतें बॉट फार्म और फर्जी अकाउंट के जरिए इजराइल विरोधी माहौल बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर खासकर युवा अमेरिकियों पर पड़ा है।
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य आर्थिक मदद को धीरे-धीरे समाप्त करना चाहता है।
उनके अनुसार, इजराइल अब मदद लेने वाले देश की बजाय अमेरिका का बराबरी वाला साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगले 10 वर्षों में अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाने की योजना बनाई जा सकती है।
