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ईरान के खिलाफ संघर्ष में पाकिस्तान का युद्धविराम प्रस्ताव अस्वीकृत

ईरान के खिलाफ चल रही लड़ाई को रोकने के लिए पाकिस्तान द्वारा भेजा गया युद्धविराम प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अस्थायी युद्धविराम के बदले होर्मुज की खाड़ी खोलने के लिए तैयार नहीं है। इस बीच, अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वह निर्धारित समय सीमा तक खाड़ी को नहीं खोलता है, तो परिणाम गंभीर होंगे। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
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ईरान के खिलाफ संघर्ष में पाकिस्तान का युद्धविराम प्रस्ताव अस्वीकृत

ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की कोशिशें

नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ चल रही लड़ाई को रोकने के प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने एक युद्धविराम प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे ईरान और अमेरिका को भेजा गया था। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इसमें अस्थायी युद्धविराम का सुझाव दिया गया था, जिसके दौरान होर्मुज की खाड़ी को खोलने का अनुरोध किया गया था। लेकिन यह भी बताया गया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को इस तरह के प्रस्ताव के लिए अधिकृत नहीं किया था।


ईरान का स्पष्ट रुख

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अस्थायी युद्धविराम के बदले होर्मुज की खाड़ी खोलने के लिए तैयार नहीं है। एक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से बातचीत में, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि समय सीमा का दबाव बनाकर ईरान से निर्णय नहीं कराया जा सकता। अधिकारी के अनुसार, ईरान को लगता है कि अमेरिका स्थायी सीजफायर के लिए तैयार नहीं है, इसलिए अस्थायी समझौते का कोई अर्थ नहीं है।


नया प्रस्ताव और अमेरिका की धमकी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से बातचीत में पश्चिम एशिया के दो अधिकारियों ने बताया कि ईरान और अमेरिका को रविवार रात एक मसौदा प्रस्ताव प्राप्त हुआ, जिसमें 45 दिनों के युद्धविराम और होर्मुज की खाड़ी को फिर से खोलने की अपील की गई है। यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की के मध्यस्थों द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो उम्मीद कर रहे हैं कि इस अवधि में स्थायी युद्धविराम तक पहुंचने के लिए वार्ता को पर्याप्त समय मिलेगा। इस प्रस्ताव को 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' कहा जा रहा है।


ट्रंप की कड़ी चेतावनी

जानकार सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पश्चिम एशिया में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा गया था। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा और जल संयंत्रों पर हमले की धमकी को और कड़ा करते हुए कहा कि यदि ईरान सरकार मंगलवार की तय समय सीमा तक होर्मुज की खाड़ी को नहीं खोलती है, तो परिणाम गंभीर होंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान के खिलाफ तीखी भाषा में चेतावनी दी।