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ईरान के नए नेता मोजतबा खामेनेई की गंभीर स्थिति पर नई जानकारी

ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताई जा रही है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, वे कोम शहर में इलाज करवा रहे हैं और अचेत अवस्था में हैं। उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति ने संदेह को बढ़ा दिया है, जबकि अमेरिकी रिपोर्टों में उनकी सेहत पर सवाल उठाए गए हैं। जानें इस स्थिति का ईरान की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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ईरान के नए नेता मोजतबा खामेनेई की गंभीर स्थिति पर नई जानकारी

मोजतबा खामेनेई की स्वास्थ्य स्थिति

नई दिल्ली। ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। एक खुफिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि वे कोम शहर में इलाज करवा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई अचेत अवस्था में हैं और इस कारण वे किसी भी निर्णय प्रक्रिया में भाग नहीं ले पा रहे हैं।


‘द टाइम्स यूके’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह जानकारी अमेरिकी और इस्राइली खुफिया एजेंसियों द्वारा खाड़ी सहयोगियों के साथ साझा की गई थी। इस रिपोर्ट में पहली बार सर्वोच्च नेता के ठिकाने का खुलासा हुआ है। बताया गया है कि मोजतबा खामेनेई का इलाज कोम में चल रहा है, जिससे वे शासन के निर्णयों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।


मोजतबा की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने संदेह को बढ़ा दिया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद से उन्होंने कोई सार्वजनिक उपस्थिति नहीं दी है। उनके नाम से जारी संदेशों का प्रसारण ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा किया जा रहा है, जिससे उनकी गंभीर स्थिति की खबरों को और बल मिला है।


अमेरिकी रिपोर्टों में खामेनेई की सेहत पर विभिन्न दावे किए गए हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि देश की कमान नए सर्वोच्च नेता के हाथ में है, लेकिन कई अमेरिकी रिपोर्टों में उनकी सेहत पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि मोजतबा कोमा में हैं, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्होंने हमलों में एक हाथ और एक पैर खो दिया है।


इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक समझौता करने का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि समय सीमा के भीतर समझौता नहीं हुआ, तो कोई पुल और बिजली संयंत्र नहीं बचेगा।


ट्रंप ने कहा कि ईरान पहले बहुत शक्तिशाली था, लेकिन अब अमेरिका ने उसकी शक्ति को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह कदम 47 साल पहले उठाए जाने चाहिए थे।