ईरान के पड़ोसी देशों की चिंता: शक्ति संतुलन में बदलाव
ईरान के पड़ोसी देशों की चिंताएँ
ईरान के पड़ोसी देशों को यह एहसास है कि वर्तमान संघर्ष ने क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। उन्हें यह भी चिंता है कि यदि ईरान को निर्णायक हार का सामना करना पड़ा, तो यह नेतन्याहू की 'ग्रेटर इजराइल' की महत्वाकांक्षा को और मजबूत करेगा।
रविवार को अमेरिका-ईरान युद्ध के समाप्त होने की संभावनाएँ बढ़ी। सुबह के समय समझौते की उम्मीदें प्रबल हुईं। डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि मुख्य बिंदुओं पर सहमति बन गई है और उन्होंने कुछ शर्तों को सार्वजनिक भी किया। हालांकि, तेहरान से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान से अनुरोध किया कि वे ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट को नजरअंदाज करें, यह कहते हुए कि ट्रंप घरेलू दबाव में हैं।
दोपहर होते-होते ट्रंप ने एक नया पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका को समझौते के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि 'समय हमारे पक्ष में है।' शाम को उन्होंने ईरान को नए हमलों की धमकी दी। इस बीच, अमेरिका में समझौते की शर्तों को लेकर विवाद बढ़ गया। इजराइल समर्थक लॉबी और रिपब्लिकन नेताओं ने इसके खिलाफ मोर्चा खोला।
इजराइल ने स्पष्ट किया कि वह तब तक किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जब तक ईरान की परमाणु क्षमता को समाप्त नहीं किया जाता। सहमति इस बात पर बनी थी कि ईरान होरमुज जलमार्ग को खोलेगा, जिसके बदले अमेरिका ईरान की जब्त संपत्तियाँ लौटाएगा। हालांकि, ईरानी सूत्रों ने बताया कि ट्रंप ने इस शर्त को गलत तरीके से पेश किया।
इन घटनाक्रमों का परिणाम यह हुआ कि सुबह की उम्मीदें शाम तक ध्वस्त हो गईं। यह घोषणा उस बैठक के बाद हुई थी, जिसमें मध्य-पूर्व के सात देशों और पाकिस्तान के प्रतिनिधि शामिल थे। ये सभी देश तुरंत शांति की आवश्यकता महसूस कर रहे थे। उन्हें यह समझ में आ रहा था कि 39 दिनों की लड़ाई ने क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल दिया है।
