ईरान के शांति प्रस्ताव पर ट्रंप का सख्त रुख, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व की कूटनीति में नया मोड़
नई दिल्ली - डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के नए शांति प्रस्ताव पर सख्त प्रतिक्रिया देने के संकेतों के बाद, मध्य पूर्व की कूटनीति एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति में पहुंच गई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अब अमेरिका के हाथ में है कि वह बातचीत का रास्ता अपनाता है या टकराव की ओर बढ़ता है।
ईरान का कूटनीतिक समाधान का प्रस्ताव
तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ बातचीत के दौरान, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि उनका देश कूटनीतिक समाधान और संघर्ष दोनों के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब अमेरिका को निर्णय लेना है।
ट्रंप का अविश्वास
शनिवार को एयर फोर्स वन में सवार होने से पहले, ट्रंप ने मीडिया से कहा कि वह तेहरान के प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे, लेकिन इसकी सफलता को लेकर उन्हें गंभीर संदेह है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अब तक 'पर्याप्त कीमत' नहीं चुकाई है। बाद में, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर और कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा कि पिछले दशकों में ईरान के आचरण को देखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करना संभव नहीं लगता।
पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया प्रस्ताव
ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसियों के अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में हालिया संघर्षों के बाद अस्थायी युद्धविराम लागू है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
स्थायी शांति की संभावना
वाशिंगटन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बिना ठोस परमाणु समझौते के किसी भी स्थायी शांति की संभावना नहीं है। वहीं, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
प्रस्ताव की प्रमुख शर्तें
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के प्रस्ताव में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं:
क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में कमी
होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंधों और नाकाबंदी का अंत
ईरानी संपत्तियों की रिहाई और मुआवजा
आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना
लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष का अंत
होर्मुज क्षेत्र के लिए नया नियंत्रण तंत्र
सैन्य विकल्प भी खुला
इस बीच, फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान, ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो अमेरिका सभी विकल्पों पर विचार करेगा।
अमेरिकी प्रशासन ने शिपिंग कंपनियों को सख्त चेतावनी दी है कि होर्मुज मार्ग की सुरक्षा के नाम पर ईरान को किसी भी प्रकार का भुगतान—चाहे नकद हो या डिजिटल—करने पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। मौजूदा हालात में साफ है कि कूटनीति और टकराव के बीच संतुलन बेहद नाजुक हो गया है। आने वाले दिनों में अमेरिका का रुख इस पूरे संकट की दिशा तय कर सकता है।
