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ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत: अमेरिका और इजरायल के हमले का असर

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हो गई है, जो अमेरिका और इजरायल के हमले के दौरान हुई। इस घटना ने देश में 40 दिनों के शोक की घोषणा के साथ-साथ जनता में असंतोष को भी बढ़ा दिया है। खामेनेई का राजनीतिक सफर और अमेरिका की रणनीतियों पर एक नजर डालते हैं। जानें इस घटनाक्रम का ईरान की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।
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ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत: अमेरिका और इजरायल के हमले का असर

ईरान की आधिकारिक पुष्टि और शोक की घोषणा


तेहरान से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के हमले के पहले दिन ही ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का निधन हो गया। प्रारंभ में, ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस खबर का खंडन किया था, लेकिन बाद में यह पुष्टि की गई कि खामेनेई की मौत हमले के कारण हुई है। ईरानी मीडिया ने इस घटना की पुष्टि करते हुए देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।


खामेनेई का जीवन और राजनीतिक सफर

86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई, जो 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में कार्यरत थे, ने इस पद को ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद संभाला था। खुमैनी ने 1979 की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया, जिसने अमेरिका समर्थित शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया। खामेनेई आज देश के आध्यात्मिक नेता के साथ-साथ सरकार, सेना और न्यायपालिका की अंतिम शक्ति भी रखते हैं।


जनता में खामेनेई के प्रति असंतोष

हाल के प्रदर्शनों ने ईरान में असंतोष की भावना को उजागर किया है। महंगाई के कारण लोगों को जीवन यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। जब ये प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए, तो अमेरिका ने इसमें हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और खामेनेई के खिलाफ कठोर कदम उठाने की बात की।


अमेरिका की रणनीति

अमेरिका का ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का एक बड़ा कारण यह है कि वह फिर से अपनी पसंद के नेता को सत्ता में लाना चाहता है। 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान पर अमेरिका समर्थित शाह का शासन था, और अमेरिका अब उस समय की राजनीतिक स्थिति को पुनर्स्थापित करना चाहता है।