ईरान ने अमेरिका के दबाव का सामना करने का लिया संकल्प
ईरान का दृढ़ संकल्प
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की है, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अंतिम सैनिक और अंतिम गोली तक लड़ाई जारी रखेगा। रायसीना डायलॉग 2026 में भाग लेने आए ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने शुक्रवार को कहा, 'तेहरान के पास अमेरिका और इजराइल के हमलों के खिलाफ अपने देश की रक्षा के लिए बहादुरी से लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हम कसम खाते हैं कि हम अंतिम गोली और अंतिम सैनिक तक विरोध करेंगे।'
ईरान के उप विदेश मंत्री ने आगे कहा, 'ट्रंप ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की बात करते हैं, जबकि वे अपने देश में न्यूयॉर्क के मेयर तक नियुक्त नहीं कर सकते। यह एक औपनिवेशिक दृष्टिकोण है। वे अपने देश में लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं।' मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खतीबजादेह ने कहा, 'ईरान इस समय पूरी तरह से युद्ध की स्थिति में है। जब हम बात कर रहे हैं, मेरे साथी नागरिकों पर अमेरिका और इजराइल का लगातार हमला हो रहा है। वर्तमान में ईरान के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वह हमलावरों के खिलाफ पूरी तरह से खड़ा हो।'
ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के सवाल पर खतीबजादेह ने कहा कि ईरान किसी भी औपनिवेशिक मिशन को रोकने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने देश की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा। ईरानी उप विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि ईरान के कुर्द समुदाय को अलगाववाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ईरान के कुर्द देश की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जबकि कुछ अलगाववादी समूहों को बाहरी एजेंसियों का समर्थन प्राप्त है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका हवाई हमलों के साथ-साथ कुर्द समूहों को भड़काने के लिए भी काम कर रहा है।
