ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता से किया इनकार, स्थिति और जटिल
ईरान का स्पष्ट बयान
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच, ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की शांति वार्ता नहीं हो रही है। पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रजा अमीरी मोगदम के इस बयान ने उस समय स्थिति को और जटिल बना दिया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है और युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। ईरान का यह कठोर रुख दर्शाता है कि हालात सामान्य होने से बहुत दूर हैं।
बातचीत की संभावना पर सवाल
ईरानी राजदूत ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान युद्ध अमेरिका की धोखेबाजी का परिणाम है। पहले जो बातचीत की कोशिशें हुई थीं, उन्हें अमेरिका ने तोड़ा और अब स्थिति युद्ध तक पहुंच गई है। दूसरी ओर, इस्राइल ने भी किसी शांति वार्ता की संभावना से इनकार किया है और कहा है कि सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
ट्रंप के दावों का खंडन
क्या सच में शांति वार्ता चल रही है?
ईरान के बयान ने ट्रंप के दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। ट्रंप ने कहा था कि बातचीत चल रही है और ईरान समझौता करना चाहता है। लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हो रही। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं और वास्तविकता अभी भी टकराव की है।
इस्राइल का रुख
इस्राइल का क्या है रुख?
इस्राइल के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत डैनी डैनन ने कहा कि उन्हें किसी बातचीत की जानकारी नहीं है। इस्राइल का लक्ष्य स्पष्ट है कि ईरान परमाणु क्षमता हासिल न कर सके। उन्होंने कहा कि इस्राइल और अमेरिका मिलकर ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। यह अभियान जारी रहेगा। इस्राइल का दावा है कि उसने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है और आगे भी दबाव बनाए रखा जाएगा।
संघर्ष की स्थिति
ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत लगभग समाप्त हो चुकी है और अमेरिका के विमान तेहरान के ऊपर उड़ान भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान पूरी तरह कमजोर हो चुका है। वहीं, ईरान भी लगातार जवाबी हमले कर रहा है और अब तक कई चरणों में हमले कर चुका है। इस्राइल के हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच पश्चिम एशिया में शांति की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है।
