ईरान ने अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर किया मिसाइल हमला
कादेर क्रूज मिसाइलों से किया गया हमला
ईरान ने यह दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर मिसाइलों से हमला किया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बेड़े को अपनी स्थिति बदलनी पड़ी। ईरानी सेना के अनुसार, इस हमले में कादेर क्रूज मिसाइलों का उपयोग किया गया।
इस घटना के बाद, अमेरिकी नौसेना को अपनी स्थिति में बदलाव करना पड़ा। ईरानी नौसेना के प्रमुख, शहराम ईरानी ने कहा कि वे अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और चेतावनी दी है कि जैसे ही यह बेड़ा मिसाइल रेंज में आएगा, उस पर और भी शक्तिशाली हमले किए जाएंगे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है और अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हिजबुल्लाह के हमले और इजराइल की प्रतिक्रिया
इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने बताया कि 2 मार्च से अब तक हिजबुल्लाह ने इजराइल पर 3,500 से अधिक रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह ने ईरान के समर्थन में इस संघर्ष में भाग लिया है। इन हमलों के जवाब में, इजराइल ने लेबनान में हवाई हमले फिर से शुरू कर दिए हैं और जमीनी कार्रवाई को भी तेज कर दिया है।
ईरान की शांति वार्ता की प्राथमिकताएँ
ईरान ने ट्रम्प प्रशासन को संकेत दिया है कि वह राष्ट्रपति की चुनी हुई टीम के बजाय जेडी वेंस के साथ बातचीत करना पसंद करेगा। सूत्रों के अनुसार, ईरान वेंस को युद्ध विरोधी मानता है और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत नहीं करना चाहता।
इससे पहले, ब्रिटिश अखबार ने रिपोर्ट दी थी कि ईरान के अधिकारी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से बात नहीं करना चाहते। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को गलत बताया और इसे विदेशी प्रचार करार दिया।
बातचीत का निर्णय ट्रम्प के हाथ में
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की ओर से बातचीत कौन करेगा, इसका निर्णय केवल राष्ट्रपति ट्रम्प ही करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह प्रक्रिया ट्रम्प के नेतृत्व में ही चलेगी।
