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ईरान ने दो जहाजों पर किया हमला, एक भारत की ओर था

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हाल ही में दो जहाजों पर हमला किया, जिसमें से एक जहाज भारत की ओर बढ़ रहा था। इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल छा दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सेना ने पहले एक जहाज पर गोलीबारी की और फिर दूसरे पर हमला किया। इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता को भी प्रभावित किया है। जानिए इस समुद्री संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।
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ईरान ने दो जहाजों पर किया हमला, एक भारत की ओर था

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड का दुस्साहस


नई दिल्ली। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हाल ही में दो जहाजों पर हमला कर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। इनमें से एक जहाज भारत की ओर बढ़ रहा था।


रिपोर्टों के अनुसार, इन जहाजों की पहचान MSC Francesca और Epaminodes के रूप में की गई है। जहाजों के मालिकों से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। इनमें से एक जहाज Epaminodes दुबई से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर आ रहा था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले अमेरिका ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा को स्थगित कर दिया था। ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को दो हफ्ते के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया था। यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को दर्शाता है।


हॉरमज़ जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, में फिर से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। बुधवार को ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल और गहरे हो गए हैं। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान की शांति वार्ता के प्रयास चल रहे थे।


ईरान ने जहाजों पर हमला क्यों किया?


ईरान की अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बुधवार सुबह इस दुस्साहसी कार्रवाई को अंजाम दिया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सेना ने पहले एक कंटेनर जहाज पर गोलियां चलाईं और उसके कुछ ही देर बाद दूसरे जहाज को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने सेना की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था, इसलिए उन पर कानूनी कार्रवाई की गई। पकड़े गए जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपाामिनोड्स के रूप में हुई है, जिन्हें ईरानी सेना अपने साथ ले गई है। इसके कुछ देर बाद एक तीसरे जहाज यूफोरिया पर भी हमला किया गया, जिसके ईरानी तट पर फंसे होने की खबर है।


ट्रंप का संघर्षविराम का फैसला काम नहीं आया?


यह हमला उस वक्त हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को खत्म होने वाले संघर्षविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने का ऐलान किया था। ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि इससे बातचीत का रास्ता खुलेगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रहेगी। ईरान इसी बात से नाराज है। ईरान के कूटनीतिज्ञों का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी नहीं हटाता, तब तक वे किसी भी तरह की शांति वार्ता के लिए मेज पर नहीं आएंगे। यानी सीजफायर होने के बावजूद समुद्र में छिड़ी यह जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।


समुद्री जंग का क्या असर कितना?


हॉरमज़ में बढ़ते तनाव का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (बेंट क्रूड) की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने या महंगी होने से न केवल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, बल्कि खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों की ढुलाई भी महंगी हो गई है। अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बंद रहा या यहां हमले जारी रहे, तो वैश्विक मंदी का खतरा और बढ़ जाएगा और आम आदमी के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।