ईरान में विरोध प्रदर्शनों का खौफनाक सच: 2000 मौतें
तेहरान में जारी हिंसा
तेहरान: ईरान में पिछले दो हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने अब एक गंभीर स्थिति का रूप ले लिया है। हाल ही में, ईरानी सरकार ने स्वीकार किया है कि इन प्रदर्शनों में अब तक 2,000 लोगों की जान जा चुकी है। यह पहली बार है जब ईरान की सरकार ने इतनी बड़ी संख्या में मौतों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है।
सरकार का बयान: प्रदर्शनकारी नहीं, आतंकवादी
एक ईरानी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि सड़कों पर बिछी लाशों के लिए 'आतंकवादी' जिम्मेदार हैं। सरकार का कहना है कि मरने वालों में आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितने निहत्थे प्रदर्शनकारी थे और कितने सुरक्षा बल। सरकार का दावा है कि जिन लोगों को वह 'आतंकवादी' मानती है, वे अब इन प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे हैं।
1979 के बाद सबसे बड़ी चुनौती
यह विरोध प्रदर्शन खराब आर्थिक स्थिति के कारण शुरू हुआ था और अब यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सत्ता में काबिज सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार एक ओर जनता के गुस्से को समझने का प्रयास कर रही है, जबकि दूसरी ओर वह उन पर गोलियां चला रही है। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।
इंटरनेट बंद और सड़कों पर अंधेरा
मानवाधिकार संगठनों ने पहले ही हजारों गिरफ्तारियों और सैकड़ों मौतों की आशंका जताई थी, लेकिन सरकारी आंकड़ा (2000 मौतें) इससे कहीं अधिक भयावह है। सरकार ने सच को छिपाने के लिए इंटरनेट बंद कर दिया है, जिससे सही जानकारी बाहर नहीं आ पा रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में रात के अंधेरे में गोलियों की आवाजें, जलती हुई इमारतें और क्षतिग्रस्त वाहन दिखाई दे रहे हैं, जो वहां के गृहयुद्ध जैसे हालात को दर्शाते हैं।
