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ईरान में स्कूल पर हमले में 150 बच्चियों की मौत: अमेरिका की भूमिका पर सवाल

28 फरवरी को ईरान के मिनाब शहर में एक स्कूल पर हुए हमले में 150 बच्चियों की मौत ने दुनिया को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह जानबूझकर किया गया हमला था या एक गलती? जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन रिपोर्ट्स में अमेरिकी सेना के शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं। जानें इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कहा गया है और आगे की जांच में क्या नया सामने आ सकता है।
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ईरान में स्कूल पर हमले में 150 बच्चियों की मौत: अमेरिका की भूमिका पर सवाल

वाशिंगटन में खौफनाक घटना का खुलासा

वाशिंगटन: अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद एक चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसने मानवता को झकझोर दिया है। इस भीषण बमबारी में दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें 150 निर्दोष बच्चियों की दर्दनाक मौत की खबर ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया है। इस खौफनाक मंजर के बाद हर कोई यह सवाल कर रहा है कि क्या युद्ध की आड़ में मासूमों का कत्लेआम उचित है? यदि यह एक भयानक गलती थी, तो असली जिम्मेदार कौन है? इस मामले में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने सीधे तौर पर अमेरिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है।


एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य जांचकर्ताओं को इस बात का गहरा संदेह है कि 150 बच्चियों की मौत के पीछे अमेरिकी सेना का हाथ हो सकता है। हालांकि, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है, लेकिन दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर इस बात के स्पष्ट संकेत दिए हैं। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्कूल पर हमला करने वाला हथियार कौन सा था और क्या अमेरिका ने जानबूझकर इस घटना को अंजाम दिया या यह किसी मिसाइल की दिशा भटकने का परिणाम था। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में नई जानकारी सामने आ सकती है और किसी तीसरे पक्ष की साजिश का पर्दाफाश हो सकता है।


इस नरसंहार को लेकर जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरान के राजदूत अली बहरीन ने पुष्टि की है कि इस हमले में 150 छात्राएं मारी गई हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव और सवालों के बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बुधवार को इस घटना की गहन जांच की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि अमेरिका कभी भी जानबूझकर नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाता। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि यदि यह हमला अमेरिका की ओर से हुआ है, तो युद्ध विभाग इसकी पूरी जिम्मेदारी के साथ जांच करेगा।


व्हाइट हाउस भी इस संवेदनशील मुद्दे पर सतर्क नजर आ रहा है। प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने इस जांच पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह याद दिलाया कि नागरिकों और बच्चों को निशाना बनाने का क्रूर इतिहास ईरान की सरकार का है, अमेरिका का नहीं। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने भी जांच जारी रहने का हवाला देते हुए इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है, जिससे इस घटना का रहस्य और भी गहरा हो गया है।