ईरान युद्ध पर ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच मतभेद: क्या होगा आगे?
इजराइल का स्पष्ट संदेश: हमले जारी रखने की आवश्यकता
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद स्पष्ट हो गए हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू का मानना है कि ईरान पर हमले जारी रखने चाहिए, जबकि ट्रम्प बातचीत और समझौते का अवसर देना चाहते हैं। मंगलवार को दोनों नेताओं के बीच एक घंटे की फोन वार्ता हुई।
नेतन्याहू का तर्क: हमले रोकना होगा गलत
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि नेतन्याहू ने ट्रम्प से कहा कि ईरान पर हमले रोकना एक गलती होगी और सैन्य कार्रवाई को जारी रखना चाहिए। सीएनएन के अनुसार, ट्रम्प ने रविवार को नेतन्याहू को सूचित किया था कि अमेरिका ईरान पर नए लक्षित हमलों की योजना बना रहा है, जिसे 'ऑपरेशन स्लेजहैमर' नाम दिया गया था। हालांकि, 24 घंटे बाद ट्रम्प ने उन हमलों को रोकने का निर्णय लिया, जो खाड़ी देशों की अपील पर आधारित था।
ग्लोबल ऑयल मार्केट पर संकट का प्रभाव
होर्मुज संकट से वैश्विक तेल बाजार पर खतरा
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि होर्मुज संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार जुलाई या अगस्त तक संकट में पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व से तेल निर्यात में कमी और गर्मियों में ईंधन की बढ़ती मांग के कारण दबाव बढ़ रहा है।
बिरोल के अनुसार, इस संकट का सबसे बड़ा समाधान होर्मुज को पूरी तरह से खोलना है, क्योंकि युद्ध से पहले लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होती थी।
ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का असर
94 जहाजों ने बदला मार्ग
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के दौरान 94 व्यावसायिक जहाजों ने अपना मार्ग बदल लिया है। चार अन्य जहाजों को निष्क्रिय किया गया है ताकि वे नाकेबंदी का उल्लंघन न कर सकें। ट्रम्प प्रशासन ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उसके बंदरगाहों की समुद्री घेराबंदी लागू की है।
अमेरिका चाहता है कि तेहरान युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते पर सहमत हो जाए। यह कार्रवाई केवल ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर लागू है, जबकि अन्य देशों के जहाजों की आवाजाही को नहीं रोका जा रहा है। हालांकि, इस नाकेबंदी के कारण होर्मुज और आसपास के समुद्री व्यापार पर असर पड़ रहा है।
