उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग में टेंडर घोटाला: सरकार को 1000 करोड़ का नुकसान
टेंडर में धांधली का मामला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में टेंडर आवंटन को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इसमें विभाग के उच्च अधिकारियों और कुछ माननीयों की संलिप्तता भी उजागर हुई है। इस मामले के चलते सरकार को लगभग 1000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
दरअसल, 16 जनवरी को 65 से अधिक टेंडरों में बैचमिक्स प्लांट की अनिवार्यता के साथ सरकार को इस नुकसान का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत के चलते निविदाएं अधिकतम पांच प्रतिशत ही कम दर पर प्रस्तुत की गई हैं। अधिकांश ठेकेदारों ने मानक दर से केवल 1 से 1.5 प्रतिशत कम दर लगाई है। इन निविदाओं का कुल मूल्य 4000 करोड़ रुपये से अधिक है।
इस बीच, 30 करोड़ रुपये से अधिक की 65 निविदाओं में चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने का मामला भी चर्चा में है। कहा जा रहा है कि सभी ठेकेदारों को बैचमिक्स प्लांट की अनिवार्यता का पालन करने का निर्देश दिया गया था, जिसके कारण कई ठेकेदार बाहर हो गए। लेकिन जब टेंडर भरे गए, तो प्रहरी पोर्टल पर बैचमिक्स प्लांट की जानकारी भरने का विकल्प ही नहीं था।
बैचमिक्स प्लांट की अनिवार्यता का पालन करने वाले ठेकेदारों ने निविदाएं नहीं भरीं, जबकि अधिकारियों और माननीयों के करीबी ठेकेदारों ने टेंडर भरे, भले ही उनके पास बैचमिक्स प्लांट नहीं था। यह भी बताया जा रहा है कि सभी टेंडर मानक दरों के आसपास ही भरे गए हैं, जबकि पिछले वर्षों में 30 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर सामान्यतः 30-40 प्रतिशत कम दर पर उठते रहे हैं। इस प्रकार, अधिकारियों और माननीयों की मिलीभगत से सरकार के राजस्व को बड़ा नुकसान हो रहा है।
माननीयों की संलिप्तता
इस पूरे मामले में माननीयों की भूमिका भी सामने आई है। उन्होंने करीबी ठेकेदारों को टेंडर दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई स्थानों पर माननीयों ने अधिकारियों से मिलकर यह तय किया कि उनके क्षेत्र में किसे टेंडर दिया जाएगा। यह भी कहा जा रहा है कि माननीयों के इशारों पर अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर यह पूरा खेल किया है। इस घोटाले में माननीयों और अधिकारियों की झोली तो भरी गई, लेकिन सरकार के राजस्व को बड़ा नुकसान हुआ है।
