उत्तर प्रदेश को मिला नया स्थायी पुलिस महानिदेशक, राजीव कृष्ण की नियुक्ति
राजीव कृष्ण बने यूपी के नए पुलिस महानिदेशक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को चार साल के लंबे इंतजार के बाद स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण (Rajiv Krishna) को प्रदेश का नया पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए पैनल पर गहन विचार-विमर्श के बाद राजीव कृष्ण के नाम को अंतिम मंजूरी दी। यूपी सरकार ने रविवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है।
राजीव कृष्ण का परिचय
राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में हुआ। उनके पिता का नाम एचके मित्तल है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है।
पुलिस सेवा में करियर
राजीव कृष्ण भारतीय पुलिस सेवा में 1991 बैच के अधिकारी हैं। उनकी भर्ती 15 सितंबर 1991 को हुई थी। उन्होंने 21 अक्टूबर 1993 को अपनी सेवा की पुष्टि की और 10 अक्टूबर 1995 को सीनियर स्केल प्राप्त किया। इसके बाद, 9 अगस्त 2005 को वे सिलेक्शन ग्रेड में पहुंचे।
एक कुशल पुलिस अधिकारी के रूप में, उन्होंने 7 अगस्त 2007 को पुलिस उपमहानिरीक्षक और 9 नवंबर 2010 को पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदोन्नति प्राप्त की। 1 जनवरी 2016 को उन्हें अपर पुलिस महानिदेशक का पद मिला और 1 फरवरी 2024 को वे पुलिस महानिदेशक के पद पर पहुंचे।
पुरस्कार और सम्मान
राजीव कृष्ण को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें पुलिस मेडल और राष्ट्रपति पुलिस पदक शामिल हैं। उन्हें DG का कमेंडेशन रॉल और विभिन्न वर्षों में DG कमेंडेशन डिस्क के सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम संस्करणों से भी सम्मानित किया गया है।
कार्यवाहक का दौर समाप्त
मई 2022 से यूपी में कोई स्थायी पुलिस महानिदेशक नहीं था। पिछले चार वर्षों में कई कार्यवाहक डीजीपी बदले गए हैं। राजीव कृष्ण ने 1 जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाला था, और अब उन्हें स्थायी कमान मिल रही है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, राज्य के स्थायी डीजीपी को न्यूनतम 2 साल का कार्यकाल मिलना अनिवार्य है। राजीव कृष्ण का रिटायरमेंट जून 2029 में होगा, जिससे उन्हें एक लंबा कार्यकाल मिलने की संभावना है।
स्थायी DGP का चयन प्रक्रिया
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए हाल ही में यूपी के मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव गृह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस प्रक्रिया में यूपीएससी अधिकारियों की सीनियरिटी, अनुभव और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए जाते हैं, और अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया जाता है।
