उत्तर प्रदेश पुलिस के फर्जी एनकाउंटर पर सपा विधायक ने उठाए सवाल

सपा विधायक ने की जांच की मांग
उत्तर प्रदेश पुलिस का फर्जी एनकाउंटर: 28 अगस्त को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए बस्ती जिले के रूधौली विधानसभा से सपा विधायक राजेंद्र चौधरी ने डीआईजी से इसकी जांच की मांग की। विधायक ने आरोप लगाया कि जिस युवक का एनकाउंटर किया गया, वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था और वह 10 या 20 रुपये की नोट भी नहीं पहचान सकता था। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं था। पुलिस ने युवक को उसके परिवार के साथ थाने बुलाया, फिर देर रात परिवार को घर भेज दिया और सुबह युवक का एनकाउंटर कर दिया। विधायक ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की अपील की है।
लड़की का हाथ पकड़ने का आरोप
28 अगस्त को जलालुद्दीन नामक युवक का एनकाउंटर किया गया, जिस पर एक लड़की का हाथ पकड़ने का आरोप था। इस मुठभेड़ में युवक के पैर में गोली लगी थी। युवक के परिजनों ने डीआईजी को दिए गए प्रार्थना पत्र में पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि 27 अगस्त को जलालुद्दीन बकरी चराने गया था, जहां गांव के जयराम और विक्रम ने उसके साथ मारपीट की। जब परिजनों ने शिकायत की, तो उन्हें गालियां दी गईं और फिर वे घर लौट गए।
पुलिस का बयान
जलालुद्दीन के भाई आशी मोहम्मद ने कहा कि 27 अगस्त की शाम को पुलिस उनके घर आई और जलालुद्दीन को थाने लाने के लिए कहा। परिवार ने उसे थाने ले जाया, जहां उन्हें बेवजह देर रात तक रोका गया। रात 12 बजे के बाद पुलिस ने परिवार को गालियां देकर थाने से भगा दिया। सुबह जब परिवार को पता चला कि जलालुद्दीन का एनकाउंटर कर दिया गया है और उसे पैर में गोली लगी है।
सपा विधायक की मांग
सपा विधायक राजेंद्र चौधरी ने कहा कि जिस युवक का एनकाउंटर किया गया, वह मंद बुद्धि और मानसिक रूप से अस्वस्थ था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर युवक पैसे लेकर भी काम नहीं कर सकता, तो उसके पास हथियार कैसे आया? उन्होंने डीआईजी से निष्पक्ष जांच की मांग की है। यदि युवक दोषी है, तो उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन अगर वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है, तो इस तरह का एनकाउंटर सवाल उठाता है।