उत्तर प्रदेश में दवा माफिया का बढ़ता प्रभाव: स्वास्थ्य विभाग में गहरी पैठ
दवा माफिया की बढ़ती गतिविधियाँ
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में दवा माफिया का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कई दावों के बावजूद, मुकेश श्रीवास्तव अपने उद्देश्यों में सफल होते नजर आ रहे हैं। दवा की खरीद-फरोख्त से लेकर सीएमओ के तबादलों तक, उनका वर्चस्व स्पष्ट है। प्रदेश के लगभग दो दर्जन जिलों में मुकेश और उनके सहयोगियों की कंपनियाँ सक्रिय हैं। खासकर हरदोई, कानपुर नगर, औरया, खलीलाबाद, सिद्धार्थनगर, हमीरपुर, मेरठ, अम्बेडकर नगर, मैनपुरी और प्रतापगढ़ में 90 प्रतिशत कार्य दवा माफिया और उनके करीबी लोगों की कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। शासन ने बजट खर्च पर रोक लगा दी है, फिर भी इन जिलों में ऊंची दरों पर खरीदारी जारी है।
दवा माफिया की कंपनियों की पहचान
दवा माफिया की कंपनियाँ, जैसे लाइफ केपर सर्जिकल, सुजु एसोसिएट, Uso इंटरनेशनल, ईशान मेडिकोज, इंडियन कार्या और दुर्गा इंटराइजेण, इन जिलों में 90 प्रतिशत कार्य करती हैं। वहीं, जिन फर्मों द्वारा 80 प्रतिशत से अधिक कार्य किया जाता है, उनमें वैष्णावी इंटरप्राइज़ेज, इना इंटरप्राइजेज, वंश इंटरप्राइजेज और तमिलनाडु सर्जिकल शामिल हैं।
सीएमओ के तबादलों पर दवा माफिया का प्रभाव
सूत्रों के अनुसार, ये फर्में दवा माफिया और उनके करीबी लोगों से जुड़ी हुई हैं। ये कंपनियाँ लंबे समय से इन जिलों के साथ-साथ अन्य जिलों में भी कार्यरत हैं। दवा माफिया अपने करीबी सीएमओ की तैनाती इन जिलों में कराता है, जिससे वह अपने मनमाने तरीके से खरीद-फरोख्त कर सके।
स्वास्थ्य विभाग में दवा माफिया का वर्चस्व
स्वास्थ्य विभाग में दवा माफिया का चलता है सिक्का
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में हर स्तर पर दवा माफिया का प्रभाव है। टेंडर कोई भी डाले, लेकिन हरदोई, कानपुर नगर, औरया, खलीलाबाद, सिद्धार्थनगर, हमीरपुर, मेरठ, अम्बेडकर नगर, मैनपुरी और प्रतापगढ़ में 90 प्रतिशत कार्य दवा माफिया और उनके करीबी फर्मों को ही मिलती है।
सीएमओ के तबादलों में दवा माफिया की भूमिका
सीएमओ के तबादले में दिखेगा दवा माफिया का असर
उत्तर प्रदेश में जल्द ही कई सीएमओ के तबादले होने वाले हैं। इस संदर्भ में दवा माफिया मुकेश श्रीवास्तव और मनीष अपने करीबी सीएमओ की तैनाती के लिए प्रयासरत हैं। इसके लिए उन्होंने अपने करीबी डॉक्टरों के नाम की सूची तैयार की है। जल्द ही कई जिलों में सीएमओ की तैनाती होगी, जिसमें दवा माफिया के करीबी डॉक्टरों को तैनाती मिल सकती है।
