उत्तर प्रदेश में दवा माफियाओं का बढ़ता प्रभाव: सीएमओ की नियुक्तियों में धांधली
दवा माफियाओं की सक्रियता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में दवा माफियाओं का प्रभाव फिर से बढ़ने लगा है। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) की ट्रांसफर-पोस्टिंग से पहले, दवा माफियाओं ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। वे अपने करीबी डॉक्टरों को सीएमओ बनाने के लिए साजिशें कर रहे हैं। जब ये डॉक्टर सीएमओ बन जाते हैं, तो दवा माफिया उनके साथ मिलकर मनमानी करते हैं। पहले भी यह बताया गया था कि कई दवा माफियाओं के इशारों पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सीएमओ की पोस्टिंग होती है।
प्रदेश में लगभग 14 जिलों में सीएमओ की तैनाती होनी है। इससे पहले, दवा माफियाओं ने अपने करीबी डॉक्टरों के नाम लिस्ट में शामिल कराने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, इन 14 जिलों के लिए लगभग तीन दर्जन नाम भेजे गए हैं, जिनमें से अधिकांश दवा माफियाओं के करीबी हैं।
हमें उन सभी दवा माफियाओं और उनके करीबी डॉक्टरों के नाम मिले हैं, जो सीएमओ बनने के लिए प्रयासरत हैं। सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया में मोटी रकम भी वसूली गई है। जब करीबी डॉक्टर सीएमओ बन जाते हैं, तो उनसे जिलों में मनमाने तरीके से काम करने की डील भी हो चुकी है।
दवा माफियाओं का दशकों पुराना सिंडिकेट
स्वास्थ्य विभाग में दशकों से दवा माफियाओं का प्रभाव रहा है। सीएमओ की ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी ये माफिया अपने करीबी डॉक्टरों को पोस्टिंग दिलवाते हैं, जिसके बाद वे अपने और अपने करीबी लोगों की फर्मों से काम करवाते हैं। हम इस पूरे सिंडिकेट में शामिल दवा माफियाओं और उनके करीबी डॉक्टरों के नाम क्रमबद्ध तरीके से उजागर करेंगे।
