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उत्तर प्रदेश में सीएमओ ट्रांसफर में जातिगत साजिश का मामला

उत्तर प्रदेश में सीएमओ के ट्रांसफर को लेकर एक नई साजिश का मामला सामने आया है, जिसमें कुछ अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया जा रहा है। चर्चा है कि एक विशेष जाति के सीएमओ को निशाना बनाया जा रहा है। यदि यह साजिश सफल होती है, तो इससे सरकार की छवि को गंभीर नुकसान हो सकता है। जानिए इस मामले में क्या हो रहा है और सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए।
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उत्तर प्रदेश में सीएमओ ट्रांसफर में जातिगत साजिश का मामला

सीएमओ ट्रांसफर में जातिगत भेदभाव का आरोप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सीएमओ के ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामले में चल रही गतिविधियाँ किसी से छिपी नहीं हैं। अक्सर इस विषय पर चर्चाएँ होती रहती हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। दरअसल, कुछ जिलों में तैनात सीएमओ को उनकी जाति के कारण परेशान किया जा रहा है, और उन्हें हटाने की योजना लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द ही उन जिलों के नाम भी बताए जाएंगे, जहां सीएमओ के खिलाफ यह साजिश चल रही है।

राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि एक विशेष जाति के सीएमओ को निशाना बनाकर उन्हें हटाने की तैयारी की जा रही है। इस मामले में सत्ता के करीबी अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ ऐसे लोग भी हैं जो स्वास्थ्य विभाग में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। यदि ऐसा है, तो यह सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाने की एक बड़ी साजिश हो सकती है।

यदि ये अधिकारी अपने इरादों में सफल होते हैं, तो इससे सरकार की छवि को गंभीर नुकसान होगा। सरकार को चाहिए कि वह ऐसे अधिकारियों और इस रैकेट में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई करे। पहले भी प्रदेश में सीएमओ की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर विवाद उठ चुके हैं, और यदि एक विशेष जाति के सीएमओ को हटाया जाता है, तो इससे सरकार की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में ऐसे सीएमओ हैं जो अपने ट्रांसफर के लिए लगातार पत्र लिख रहे हैं, लेकिन उन्हें पद से नहीं हटाया जा रहा है। इसके पीछे वे पारिवारिक समस्याओं का हवाला दे रहे हैं। वहीं, कई जिलों में तैनात सीएमओ के खिलाफ जिलाधिकारी भी पत्र लिख चुके हैं, लेकिन वे लंबे समय से अपने पद पर बने हुए हैं।

सरकार को मामले का संज्ञान लेना चाहिए
यदि जातिगत आधार पर सीएमओ के ट्रांसफर की साजिश सफल होती है, तो इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा और सरकार की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसलिए, सरकार को इस मामले का संज्ञान लेकर जातिगत आधार पर सीएमओ को हटाने की साजिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।