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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित किया जाए। बैठक में यात्रा मार्गों पर वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध, भीड़ प्रबंधन और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता पर चर्चा की गई। धामी ने सभी अधिकारियों को श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक

चारधाम यात्रा की तैयारियों पर चर्चा

उत्तराखंड: चारधाम यात्रा इस समय अपने उच्चतम स्तर पर है, जिसमें अब तक 28 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। मॉनसून के आगमन से पहले और अधिक भक्तों के आने की संभावना को देखते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 जून, मंगलवार को सचिवालय में चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की।


बैठक में, सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और निरंतर संवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय और प्रभावी संवाद के माध्यम से यात्रा को और अधिक सुरक्षित और सफल बनाया जा सकता है।


सीएम ने कहा कि चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है।


उन्होंने कहा कि यदि किसी धाम या पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ होती है, तो वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए। भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाते हुए यात्रियों को आगे भेजा जाए, ताकि धामों में अव्यवस्था न हो।


सीएम ने निर्देश दिए कि जहां श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उचित व्यवस्था की जाए। भीड़ नियंत्रण के दौरान श्रद्धालुओं को केवल रोका नहीं जाए, बल्कि उन्हें इसके कारण और संभावित प्रतीक्षा अवधि की जानकारी भी दी जाए।


उन्होंने सभी अधिकारियों को श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल और एफएम रेडियो के माध्यम से आवश्यक सूचनाएं प्रसारित की जाएं।


सीएम ने कहा कि चारधाम यात्रा का पहला चरण प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन और अन्य संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक संचालित हुआ है। अब यात्रा दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून और प्रतिकूल मौसम प्रमुख चुनौतियाँ होंगी।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को श्रद्धालुओं से प्राप्त फीडबैक, शिकायतों और सुझावों की दैनिक समीक्षा करने और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस और राहत-बचाव उपकरणों की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।


सभी अधिकारियों को फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने और श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल को चारधाम यात्रा की सभी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


उन्होंने यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन सुनिश्चित करने और खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग कर गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश भी दिए।


बैठक में, मुख्यमंत्री ने चारों धामों और पैदल यात्रा मार्गों पर स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने पैदल मार्गों पर शौचालयों की पर्याप्त संख्या और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गंभीर मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराने के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा हेतु राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए।


मुख्यमंत्री ने केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में शेड स्थापित करने और वर्षा व धूप से बचाव की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।