Newzfatafatlogo

उत्तराखंड में भाजपा सरकार की चुनौतियाँ: अंकिता भंडारी केस और विवादित बयान

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की सरकार को हाल ही में अंकिता भंडारी केस और ऐंजल चकमा की हत्या के विवादों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा नेताओं की लगातार गलतियों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। उर्मिला सनावर के आरोपों और भाजपा के नेताओं की विवादास्पद टिप्पणियों ने मामले को और उलझा दिया है। जानें इस राजनीतिक संकट की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणाम।
 | 
उत्तराखंड में भाजपा सरकार की चुनौतियाँ: अंकिता भंडारी केस और विवादित बयान

भाजपा सरकार की स्थिति

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की सरकार के लिए सब कुछ सही चल रहा था। संघ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में उनकी स्थिति मजबूत थी। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करके भाजपा कार्यकर्ताओं में अपनी छवि को और मजबूत किया। लेकिन अचानक अंकिता भंडारी मामले का मुद्दा फिर से उठ खड़ा हुआ, साथ ही पूर्वोत्तर के छात्र ऐंजल चकमा की हत्या का मामला भी सामने आया, जिसमें नस्ली टिप्पणियों का पहलू जुड़ा हुआ था। ऐंजल के पिता, जो बीएसएफ में हैं, ने एक भावुक वीडियो अपील की, जिससे मामला और जटिल हो गया। राज्य सरकार ने अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की, लेकिन इसके बावजूद उत्तराखंड में प्रदर्शन जारी हैं। इसका मुख्य कारण भाजपा नेताओं की लगातार गलतियाँ हैं, जिन्होंने स्थिति को और उलझा दिया।


उर्मिला सनावर का विवाद

सोचिए, जब सरकार को अंततः वीआईपी का पता लगाने के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी, तो फिर अभिनेत्री उर्मिला सनावर पर आरोप लगाने का क्या औचित्य था? उर्मिला ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि वीआईपी का नाम 'गट्टू' है, जिसके लिए अंकिता भंडारी पर पुलकित आर्य ने दबाव डाला था। जब अंकिता ने राजी नहीं हुई, तो उसकी हत्या कर दी गई। इस खुलासे के बाद भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का नाम सामने आया, जिसके बाद उन्हें अदालत में जाकर रोक लगाने की आवश्यकता पड़ी। इस बीच, प्रदेश भाजपा के नेताओं ने उर्मिला पर कई टिप्पणियाँ कीं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उन्हें 'कांग्रेस का खिलौना' कहा, जिससे महिलाओं में और आक्रोश बढ़ गया।


भाजपा सांसद का प्रेस कॉन्फ्रेंस

इस विवाद के बीच भाजपा सांसद नरेश बंसल ने मामले को संभालने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन उन्हें बीच में ही उठकर जाना पड़ा क्योंकि वे पत्रकारों के सवालों का सामना नहीं कर सके। सवाल यह है कि जब उनकी तैयारी पूरी नहीं थी, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस की आवश्यकता क्यों थी? क्या पार्टी के किसी बड़े नेता ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था? इससे पहले, पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन वह भी विफल रहा क्योंकि उनके पास मीडिया के सवालों के जवाब नहीं थे। राज्य सरकार के मंत्री सुबोध उनियाल और विधायक खजान दास ने भी मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन उनका प्रयास भी असफल रहा। लोगों का गुस्सा बढ़ता गया। चुप रहकर सीबीआई जांच की सिफारिश करना एक उपाय था, लेकिन भाजपा नेताओं ने बोलकर और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मामले को और उलझा दिया।