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उत्तराखंड में भारी बारिश से तबाही: मौसम विभाग का अलर्ट जारी

उत्तराखंड में इस साल मॉनसून ने भारी तबाही मचाई है, जिससे कई लोग प्रभावित हुए हैं। मौसम विभाग ने 2 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सीएस तोमर ने बताया कि इस वर्ष बादल फटने की कोई घटना नहीं हुई है, फिर भी नुकसान अधिक हुआ है। जानें इस स्थिति के बारे में और क्या कहा गया है मौसम विभाग द्वारा।
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उत्तराखंड में भारी बारिश से तबाही: मौसम विभाग का अलर्ट जारी

उत्तराखंड में बारिश का कहर

उत्तराखंड में भारी बारिश: इस वर्ष मॉनसून ने उत्तराखंड में व्यापक नुकसान पहुँचाया है। अत्यधिक वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और बाढ़ ने कई लोगों की जान ले ली है, जबकि कई अन्य लापता हैं। उत्तरकाशी जिले के धराली जैसे कुछ स्थानों का तो अस्तित्व ही मिट गया है। मौसम विभाग ने 2 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे राज्य में राहत की संभावना कम नजर आ रही है।


मौसम विज्ञान केंद्र का खुलासा

देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस मॉनसून सीजन में उत्तराखंड में बादल फटने की कोई घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा, 'बादल फटना एक तकनीकी शब्द है, जब एक घंटे में 100 मिमी से अधिक बारिश होती है। इस साल ऐसा कोई आंकड़ा नहीं मिला है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 40 से 70 मिमी के बीच बारिश ही हुई है, इसलिए धराली, थराली या चमोली-रुद्रप्रयाग में बादल फटने की बात गलत है।


कम बारिश, फिर भी अधिक नुकसान

सीएस तोमर के अनुसार, इस वर्ष सबसे अधिक नुकसान उन जिलों में हुआ है, जहाँ बारिश सामान्य से कम रही। उदाहरण के लिए, उत्तरकाशी में भयंकर तबाही हुई, लेकिन बारिश सामान्य से अधिक नहीं थी। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस मॉनसून में उत्तराखंड में सामान्य से केवल 16% अधिक बारिश हुई, जो बहुत अधिक नहीं मानी जाती। आगामी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।


भविष्यवाणी और सतर्कता

मौसम विभाग ने 30 अगस्त से 2 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। तोमर ने कहा, '2 सितंबर के बाद बारिश में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।' लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।


क्षेत्रीय मौसम का प्रभाव

तोमर ने यह भी बताया कि अगस्त में पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हुई अत्यधिक बारिश के बादल यदि उत्तराखंड की ओर बढ़ते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। मौसम विभाग के अनुसार, इस वर्ष की बारिश सामान्य मॉनसून के अनुरूप रही, लेकिन स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों ने नुकसान को बढ़ा दिया।