उत्तराखंड सरकार ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे प्रवासियों की मदद के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया
उत्तराखंड में प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
उत्तराखंड: अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में स्थिति बिगड़ रही है, जिससे भारत को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। न केवल पेट्रोलियम उत्पादों की कमी हो रही है, बल्कि वहां फंसे प्रवासी भारतीयों की चिंता भी बढ़ गई है। इसी संदर्भ में, उत्तराखंड सरकार ने ऐसे प्रवासियों का रिकॉर्ड इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंडियों की सहायता के लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।
इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंताओं को जन्म दिया है। भारत को प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम की आपूर्ति को लेकर चिंता है, वहीं प्रवासी भारतीयों के फंसे होने की खबरें भी सरकार के लिए नई चुनौतियाँ पेश कर रही हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार और राज्य सरकारें मिलकर फंसे हुए लोगों के रिकॉर्ड तैयार कर रही हैं, ताकि उनकी सहायता की जा सके।

उत्तराखंड सरकार ने विदेश में फंसे प्रवासी नागरिकों की सहायता के लिए सीनियर आईपीएस अधिकारी निवेदिता कुकरेती को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। खाड़ी देशों और मध्य पूर्व एशिया की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह कदम उठाया गया है ताकि वहां रह रहे उत्तराखंड के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
नोडल अधिकारी निवेदिता कुकरेती का कार्य होगा कि वे खाड़ी और मध्य पूर्व एशिया में रह रहे उत्तराखंड के लोगों की स्थिति पर नजर रखें और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सहायता प्रदान करें। शासन के आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ईरान, इजराइल, ओमान आदि देशों में निवास कर रहे उत्तराखंड के लोगों की हर संभव मदद की जाएगी।
सरकार ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए उत्तराखंड पुलिस द्वारा एक हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी भी जारी की है। किसी भी आपात स्थिति में लोग मोबाइल नंबर 9411112792 और ईमेल आईडी dgc-police-ua@nic.in पर संपर्क कर सकते हैं।
इसके अलावा, सरकार ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति का परिजन या परिचित खाड़ी देशों या मध्य पूर्व एशिया में रह रहा है और किसी समस्या का सामना कर रहा है, तो उसकी जानकारी शासन को उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए कुछ आवश्यक विवरण मांगे गए हैं, जैसे संबंधित व्यक्ति का नाम, पिता/पति का नाम, जिस देश में वह रह रहा है उसका नाम, वहां का पूरा पता, पासपोर्ट नंबर, मोबाइल या व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी।
यदि संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क नहीं हो पा रहा है, तो किसी वैकल्पिक संपर्क व्यक्ति की जानकारी भी दी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड में मौजूद परिजनों का पता और संपर्क विवरण भी साझा करना आवश्यक होगा, ताकि समन्वय में कोई कठिनाई न हो।
सरकार का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेश में रह रहे उत्तराखंड के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संकट की स्थिति में उन्हें समय पर सहायता प्रदान करना है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। नोडल अधिकारी की नियुक्ति और हेल्पलाइन जारी करने जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सजग है और हर स्तर पर उनकी मदद के लिए तैयार है।
