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उमर खालिद की जमानत रद्द: दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

उमर खालिद की जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है, जिससे उनके परिवार और समर्थकों में निराशा फैल गई है। खालिद ने अपने सह-आरोपी को जमानत मिलने पर खुशी जताई है। यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ा है, जिसमें कई लोग मारे गए थे। जानें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है और खालिद का क्या कहना है।
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उमर खालिद की जमानत रद्द: दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

उमर खालिद की जमानत रद्द


नई दिल्ली: जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद की दिल्ली दंगों से संबंधित जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस निर्णय के बाद, खालिद ने अपने सह-आरोपी को जमानत मिलने पर खुशी व्यक्त की। उनकी साथी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बारे में जानकारी साझा की। लाहिड़ी ने लिखा, "जेल अब मेरा जीवन है" और खालिद के भावनात्मक शब्दों का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने उन सभी आरोपियों के लिए खुशी जताई जिन्हें जमानत मिली।


सुप्रीम कोर्ट का जमानत से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। हालांकि, पांच अन्य कार्यकर्ताओं को जमानत मिली।


लाहिड़ी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खालिद ने कहा, "मुझे उन सभी लोगों के लिए बहुत खुशी है जिन्हें जमानत मिल गई! बहुत राहत मिली।" उन्होंने जेल में अपनी अगली मुलाकात में शामिल होने का भी संकेत दिया, जिसमें खालिद ने कहा, "अच्छा अच्छा, आ जाना। अब यही जिंदगी है।"



फरवरी 2020 के दिल्ली दंगे

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से संबंधित है, जिसमें 53 लोगों की जान गई और 700 से अधिक लोग घायल हुए। पुलिस ने खालिद और अन्य आरोपियों पर इस घटना की साजिश रचने का आरोप लगाया है, जबकि खालिद ने अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन खालिद ने अब तक लगभग पांच साल जेल में बिताए हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुकदमे में देरी जमानत के लिए आधार नहीं बन सकती। सभी सात आरोपियों पर दंगों के कथित मास्टरमाइंड होने के आरोप हैं और उन्हें कठोर आतंकवाद-विरोधी धारा UAPA और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत केस दर्ज किया गया है।


परिवार की निराशा

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद, उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। फैसला आ चुका है और मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है। परिवार और समर्थक खालिद की न्यायिक लड़ाई के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।