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उर्वरक की आपूर्ति में कमी नहीं, खरीफ सीजन के लिए तैयार: इफको

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बावजूद, इफको ने आश्वासन दिया है कि देश में उर्वरकों की आपूर्ति सामान्य है और किसानों को खरीफ सीजन में किसी भी कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, उत्पादन में 6 से 9 लाख टन की कमी की संभावना है। सरकार ने आपातकालीन उपायों की योजना बनाई है और एमएसएमई सेक्टर को समर्थन देने के लिए अतिरिक्त पैकेज पर विचार कर रही है। जानें इस संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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उर्वरक की आपूर्ति में कमी नहीं, खरीफ सीजन के लिए तैयार: इफको

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद उर्वरक की स्थिति


हालांकि, उत्पादन में कमी की आशंका


नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बावजूद, देश में उर्वरकों की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है। इफको, जो कि दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी उर्वरक कंपनी है, ने आश्वासन दिया है कि किसानों को आगामी खरीफ सीजन में किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, संकट के कारण उर्वरक उत्पादन में 6 से 9 लाख टन की कमी आने की संभावना जताई गई है।


आपातकालीन उपायों की योजना

सरकार संभावित कमी को पूरा करने के लिए आपातकालीन उपायों की योजना बना रही है, जिसमें मोरक्को जैसे देशों से आयात शामिल है। इफको के आंवला संयंत्र के सीनियर जनरल मैनेजर सत्यजीत प्रधान ने बताया कि गैस आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आई है, जिससे उर्वरक का उत्पादन और वितरण सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति के बावजूद कंपनी की उत्पादन और मार्केटिंग गतिविधियां सामान्य हैं।


एमएसएमई सेक्टर को समर्थन

पश्चिम एशिया में संघर्ष के लंबे समय तक चलने की संभावना के बीच, केंद्र सरकार कमजोर क्षेत्रों को राहत देने के लिए अतिरिक्त पैकेज पर विचार कर रही है। सरकार की प्राथमिकता एमएसएमई सेक्टर को सहारा देना और महंगाई को नियंत्रित करना है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि सरकार को प्रभावित क्षेत्रों और कमजोर वर्गों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ दीर्घकालिक जरूरतों के लिए वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन भी करना होगा।


क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि

सरकार ने पहले ही ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल को पूरी तरह से शुल्क मुक्त कर दिया गया है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो अब लगभग 100 डॉलर के आसपास है।


भारत पर इसका सीधा असर पड़ना तय है, क्योंकि देश अपनी जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत तेल आयात करता है। निर्यात क्षेत्र को राहत देने के लिए सरकार ने 497 करोड़ रुपये की रिलीफ योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य माल ढुलाई की बढ़ती कीमतों, बीमा प्रीमियम और युद्ध से जुड़े जोखिमों से जूझ रहे निर्यातकों को सहायता प्रदान करना है।