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उर्वरक सब्सिडी प्रणाली का डिजिटल परिवर्तन: किसानों के लिए नई उम्मीद

भारत की उर्वरक सब्सिडी प्रणाली अब पूरी तरह से डिजिटल हो गई है, जिससे किसानों को समय पर लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2026 से एकीकृत ई-बिल प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है, जो खाद कंपनियों के सब्सिडी दावों और भुगतान को ऑनलाइन प्रोसेस करेगी। इस नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को खाद की उपलब्धता में भी सुधार होगा। जानें इस प्रणाली के तहत किसानों और कंपनियों को क्या लाभ होगा और यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है।
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उर्वरक सब्सिडी प्रणाली का डिजिटल परिवर्तन: किसानों के लिए नई उम्मीद

उर्वरक सब्सिडी का डिजिटल रूपांतरण

भारत की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक, उर्वरक सब्सिडी, अब पूरी तरह से डिजिटल हो गई है। केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2026 से लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक खाद सब्सिडी को ऑनलाइन प्रोसेस करने के लिए एकीकृत ई-बिल प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इस प्रणाली के माध्यम से, खाद कंपनियों के सब्सिडी दावे, भुगतान और निगरानी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगे.


नई ई-बिल प्रणाली का परिचय

इस नई डिजिटल व्यवस्था में उर्वरक विभाग की वित्तीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह से ऑनलाइन किया गया है। अब सब्सिडी से संबंधित हर चरण एक ही सिस्टम में दर्ज किया जाएगा.


किसानों और कंपनियों के लिए लाभ

मंत्री नड्डा ने उद्घाटन के दौरान कहा कि यह पहल डिजिटल इंडिया और विकसित भारत के लक्ष्यों को सशक्त बनाती है। उन्होंने बताया कि उर्वरक सब्सिडी का डिजिटलीकरण पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के हितों की रक्षा करेगा.


पूरी सप्लाई चेन का एकीकरण

उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्र ने बताया कि यह बदलाव केवल कागज रहित बिलिंग तक सीमित नहीं है। नई प्रणाली से कच्चे माल की खरीद से लेकर तैयार खाद और सब्सिडी भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकेगा.


भुगतान में देरी का अंत

संयुक्त सचिव मनोज सेठी ने बताया कि ई-बिल सिस्टम से सब्सिडी भुगतान में वर्षों से चली आ रही देरी समाप्त होगी। अब साप्ताहिक आधार पर भुगतान संभव होगा.


महत्वपूर्ण बदलाव का प्रभाव

भारत में उर्वरक सब्सिडी कृषि व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। डिजिटल प्रणाली से सरकारी खर्च पर बेहतर नियंत्रण होगा और किसानों तक लाभ समय पर पहुंचेगा.