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ऊंचाई पर यात्रा के दौरान पेट खराब होने के कारण और समाधान

नए साल में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा के दौरान पेट में परेशानी होना आम है। इसका मुख्य कारण हाइपोक्सिया है, जो ऑक्सीजन की कमी के कारण होता है। न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने इस समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। जानें कि कैसे आप अपनी यात्रा के दौरान पेट को स्वस्थ रख सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं से बच सकते हैं।
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ऊंचाई पर यात्रा के दौरान पेट खराब होने के कारण और समाधान

ऊंचाई पर यात्रा के दौरान पेट की समस्याएं

नई दिल्ली: नए साल में लोग पहाड़ी क्षेत्रों में छुट्टियां मनाने के लिए जा रहे हैं। हालांकि, ऊंचाई पर यात्रा करते समय अक्सर पेट में परेशानी होती है। इसका मुख्य कारण हाइपोक्सिया, यानी ऑक्सीजन की कमी है।


ऊंचाई पर वेगस नर्व का कार्य प्रभावित होता है, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, गैस बनती है और पेट में फूलने की समस्या होती है। ठंड का मौसम भी पाचन को और अधिक प्रभावित करता है। ट्रैवलिंग से माइक्रोबायोम पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस संदर्भ में, सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने ऊंचाई पर यात्रा करने वालों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।


न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, उच्च ऊंचाई पर केवल पेट फूलने की समस्या नहीं होती, बल्कि पाचन तंत्र भी बेतरतीब हो जाता है। इसका मुख्य कारण हाइपोक्सिया है, जो शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है और पाचन में बाधा डालता है।


एक अध्ययन के अनुसार, हाइपोक्सिया आंतों की गति को धीमा कर देता है, जिससे पाचन में बदलाव आता है। ऊंचाई पर हाइपोक्सिया के कारण वेगस नर्व सही से कार्य नहीं कर पाती। यह नर्व पाचन को नियंत्रित करती है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप, आंतों की गतिशीलता कम हो जाती है, एंजाइम्स का सही से रिलीज होना बाधित होता है और पेट देर से खाली होता है। इससे गैस, ब्लोटिंग और असहजता बढ़ जाती है।


इसके अलावा, ऊंचाई पर ठंड का मौसम सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर देता है, जो 'फाइट या फ्लाइट' मोड में चला जाता है। यह मोड शरीर को ऊर्जा बचाने के लिए मजबूर करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया और धीमी हो जाती है।


विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एयर प्रेशर की समस्या नहीं है, बल्कि पूरा नर्वस सिस्टम ऊर्जा संरक्षण मोड में चला जाता है। यात्रा का प्रभाव पेट के माइक्रोबायोम पर भी पड़ता है, जो गट बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखता है। ऊंचाई पर यह प्रभाव और बढ़ जाता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।


न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह है कि जैसे हम सूटकेस पैक करने से पहले सोच-समझकर तैयारी करते हैं, उसी तरह पेट को भी यात्रा के लिए तैयार करें। यात्रा पर निकलने से पहले हल्का भोजन करें, हाइड्रेशन का ध्यान रखें और ऐसे खाद्य पदार्थों का चयन करें जो पाचन में मदद करें।