एयर इंडिया पर अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध का प्रभाव: उड़ानों में कटौती
एयर इंडिया की उड़ानों में कमी
देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन, एयर इंडिया, पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। जेट फ्यूल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण, एयर इंडिया ने अपनी उड़ानों में कमी करने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, एयरलाइन मई से जुलाई के बीच अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या में कमी करने जा रही है। इसके पीछे कई देशों द्वारा एयरस्पेस पर लगाए गए प्रतिबंध भी एक कारण हैं।
युद्ध के कारण एयरस्पेस पर पाबंदी
पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते बढ़ी तनाव की स्थिति के कारण कई देशों ने अपने एयरस्पेस पर पाबंदी लगा दी है। इस स्थिति के कारण एयर इंडिया को कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत में वृद्धि हो रही है।
22,000 करोड़ का अनुमानित नुकसान
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया जून में यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के लिए अपनी उड़ानों की संख्या में कमी करने की योजना बना रही है। कंपनी के सूत्रों ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 के अंत तक एयर इंडिया ग्रुप को 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की संभावना है।
सीईओ का कर्मचारियों के लिए संदेश
इस संदर्भ में, कंपनी के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने एयर इंडिया के कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा, जिसमें उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें अब लाभकारी नहीं रह गई हैं। उन्होंने बताया कि इन उड़ानों को जारी रखने से कंपनी को और अधिक नुकसान होगा।
विल्सन ने अपने स्टाफ को बताया, 'हमने अप्रैल और मई के लिए कुछ उड़ानों में कमी की है। जेट फ्यूल की कीमतों में भारी वृद्धि, एयरस्पेस के बंद होने और लंबी उड़ान रूटों के कारण हमारी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें अब लाभकारी नहीं हैं।'
घरेलू उड़ानों पर प्रभाव
विल्सन ने आगे कहा कि स्थिति बहुत कठिन है, जिससे एयरलाइन को और सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'एयरस्पेस और जेट फ्यूल की कीमतों की स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण है, जिससे हमारे पास जून और जुलाई के लिए शेड्यूल में कमी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।'
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि घरेलू उड़ानों पर प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम है। उन्होंने कहा, 'घरेलू ईंधन की कीमतों में वृद्धि को सरकार द्वारा 25% तक सीमित करने के कारण घरेलू उड़ानों के लाभ पर असर पड़ा है, लेकिन यह कम मात्रा में हुआ है।'
