ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट हुए 15 भारतीय नागरिक: क्या है पूरी कहानी?
नई दिल्ली में 15 भारतीयों की वापसी
नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में 15 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया, जिन्हें एक विशेष चार्टर्ड फ्लाइट के माध्यम से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लाया गया। जैसे ही वे भारत पहुंचे, उन्हें सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया। इनमें से 9 लोग पंजाब से हैं, जबकि अन्य हरियाणा, उत्तराखंड और तेलंगाना से संबंधित हैं।
डिपोर्टेशन के कारण
इन भारतीय नागरिकों के डिपोर्ट होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता, वीजा नियमों का उल्लंघन और अधिकारियों के साथ सहयोग न करना शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से केवल 2 व्यक्तियों के पास वैध पासपोर्ट थे, जबकि अन्य को भारतीय दूतावास द्वारा जारी 'आपातकालीन प्रमाणपत्र' के माध्यम से वापस भेजा गया।
विशेष चार्टर्ड फ्लाइट का उपयोग
इन सभी को वापस लाने के लिए एक विशेष चार्टर्ड विमान का सहारा लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि कुछ व्यक्तियों का व्यवहार असहयोगी था, जिससे उन्हें सामान्य यात्री उड़ानों में भेजना जोखिम भरा हो सकता था। इस फ्लाइट में अतिरिक्त सुरक्षा बल, मेडिकल स्टाफ और एस्कॉर्ट टीम तैनात की गई थी ताकि यात्रा सुरक्षित रूप से पूरी हो सके।
डिटेंशन सेंटर में रखे गए लोग
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर्स में रखा गया था, जिनमें शामिल हैं:
- योंगा हिल इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर (पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया)
- मेलबर्न इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर (विक्टोरिया)
- विलावुड इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर (न्यू साउथ वेल्स)
डिपोर्ट किए गए लोगों पर आरोप
डिपोर्ट किए गए अधिकांश व्यक्तियों पर गंभीर आपराधिक मामलों के आरोप हैं, जैसे कि ड्रग्स रखना, चोरी, धोखाधड़ी, हिंसा, जमानत का उल्लंघन और पुलिस के साथ दुर्व्यवहार।
- जसवंत सिंह (34 वर्षीय): हथियार और ड्रग्स से जुड़े मामलों के साथ चोरी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप।
- अंग्रेज सिंह (32 वर्षीय): धोखाधड़ी, ड्रग्स अपराध और अवैध प्रवेश के मामले।
- सतिंदरजीत सिंह शेरगिल (31 वर्षीय): घरेलू हिंसा और पुलिस के खिलाफ अपराध।
- हरप्रीत सिंह सिद्धू (30 वर्षीय): ड्रग्स, धोखाधड़ी और जमानत उल्लंघन।
- जगजीत सिंह सिद्धू (35 वर्षीय): सेंधमारी और वाहन चोरी के मामले।
- जसप्रीत सिंह (37 वर्षीय): कई मामलों में आरोपित, हालांकि दोष सिद्ध नहीं।
- कंवलजीत सिंह (27 वर्षीय): चोरी, ड्रग्स और पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश।
- रणजीत सिंह (35 वर्षीय): हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध।
- हरप्रीत सिंह (41 वर्षीय): पुलिस पर हमला और गंभीर आरोपों में शामिल।
- श्रुति शर्मा (45 वर्षीय): वीजा (इमिग्रेशन) नियमों के उल्लंघन और अधिकारियों के साथ सहयोग न करने के कारण डिपोर्ट किया गया।
- अब्दुल्ला सालेह बहाताब (31 वर्षीय): धमकी देने और डराने-धमकाने के मामलों में शामिल।
पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर कहा है कि सरकार यह जांच करेगी कि इन लोगों के दस्तावेज कैसे तैयार हुए और किन लोगों ने इसमें मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर विदेश मंत्रालय से संपर्क किया जाएगा और मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा।
भारत लौटने के बाद की प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, भारत लौटने के बाद इन लोगों को प्रारंभिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें नकद मदद, घर तक पहुंचाने की व्यवस्था और अस्थायी ठहरने की सुविधा शामिल हो सकती है।
यह घटना यह दर्शाती है कि ऑस्ट्रेलिया अपने इमिग्रेशन और कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है, खासकर उन विदेशी नागरिकों के खिलाफ जो नियमों का उल्लंघन करते हैं।
