कनाडा की रिपोर्ट में भारत पर जासूसी के आरोप, खालिस्तान मुद्दा भी शामिल
कनाडा की खुफिया एजेंसी का आरोप
टोरंटो/नई दिल्ली: कनाडा की खुफिया एजेंसी, Canadian Security Intelligence Service (CSIS), ने अपनी ‘पब्लिक रिपोर्ट 2025’ में भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस रिपोर्ट में भारत को चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान के साथ उन देशों की सूची में रखा गया है, जिन पर कनाडा में कथित ‘विदेशी दखलंदाजी’ और जासूसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।
भारत के गुप्त संबंधों का आरोप
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने रणनीतिक हितों को बढ़ावा देने के लिए कनाडाई राजनेताओं, पत्रकारों और इंडो-कनाडाई समुदाय के कुछ सदस्यों के साथ गुप्त संबंध बनाने की कोशिश की है। इसके साथ ही, ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ के तहत आलोचकों पर निगरानी रखने और दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
खालिस्तान समर्थक आंदोलन का संदर्भ
कनाडा की रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थक आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत इसे अपनी घरेलू सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण तरीके से खालिस्तान की वकालत करना कनाडा में एक ‘वैध राजनीतिक गतिविधि’ है और इसे चरमपंथ नहीं माना जाता। रिपोर्ट यह मानती है कि भारत खालिस्तानी अलगाववाद को अपनी घरेलू स्थिरता के लिए खतरा मानता है और उसी के खिलाफ कदम उठाता है।
Air India Flight 182 का उल्लेख
रिपोर्ट में Air India Flight 182 bombing का भी जिक्र किया गया है, जिसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला माना जाता है। इस हमले में 329 लोगों की मौत हुई थी और इसके पीछे कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथियों का हाथ होने का संदेह जताया गया था।
खालिस्तानी चरमपंथ का खतरा
CSIS के अनुसार, वर्ष 2025 में कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथ से जुड़ा कोई बड़ा हमला दर्ज नहीं हुआ, लेकिन यह खतरा अब भी बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ चरमपंथी तत्व कनाडाई जमीन का इस्तेमाल भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, फंडिंग जुटाने और साजिश रचने के लिए कर रहे हैं।
समुदाय से धन जुटाने का आरोप
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ चरमपंथी कनाडाई संस्थानों का दुरुपयोग कर रहे हैं और समुदाय के लोगों से धन जुटाकर उसे हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ते हैं। फिलहाल, इस रिपोर्ट पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
