कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 21 दिन की डेडलाइन निर्धारित की
कनाडा सरकार के नए निर्देशों से छात्रों में चिंता
टोरंटो: कनाडा सरकार के हालिया निर्देशों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। सरकार ने दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया को सख्त करते हुए छात्रों को आवश्यक कागजात जमा करने के लिए 21 दिन का समय दिया है। इस निर्णय से भारत समेत कई देशों के छात्रों में हड़कंप मच गया है।
कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है, जिसमें उनसे स्टडी परमिट नियमों के अनुपालन की पुष्टि के लिए दस्तावेज मांगे गए हैं। इस कार्रवाई में सैकड़ों भारतीय छात्र भी शामिल हैं। यह कदम इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा द्वारा ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
कनाडा की संसद में 23 मार्च को पेश रिपोर्ट में ऑडिटर जनरल केरेन होगन ने कहा था कि विभाग को उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि कार्यक्रम की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
नोटिस के अनुसार, छात्रों को अपने डिज़ाइनेटेड लर्निंग इंस्टीट्यूशन (DLI) से आधिकारिक पत्र जमा करना होगा, जिसमें उनके वर्तमान नामांकन की पुष्टि हो। इसके साथ ही, उन्हें अपने वर्तमान और पूर्व शैक्षणिक संस्थानों के ट्रांसक्रिप्ट (मार्कशीट) भी प्रस्तुत करने होंगे।
नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 21 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए गए, तो छात्रों का अस्थायी निवासी दर्जा समाप्त किया जा सकता है।
इस निर्णय से छात्रों और इमिग्रेशन सलाहकारों के बीच चिंता बढ़ गई है। मिसिसॉगा के इमिग्रेशन कंसल्टेंट कंवर सिराह ने कहा कि यह कार्रवाई काफी देर से की जा रही है। उनके अनुसार, पिछले वर्ष फर्जीवाड़े के मामलों में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन उस समय अधिकांश छात्र अपना कोर्स पूरा कर चुके हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कितने छात्रों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वर्क परमिट हासिल किए। उनके मुताबिक, इस समस्या में कुछ शिक्षण संस्थानों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि हाउस ऑफ कॉमन्स की स्टैंडिंग कमिटी ऑन सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन को हर महीने की 15 तारीख तक सभी संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट सौंपी जाए।
