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कलेक्टर का खाद दुकानों पर औचक निरीक्षण, कालाबाजारी पर कड़ी नजर

कलेक्टर ने शुक्रवार को पेब्बड़ नगरपालिका में खाद दुकानों का औचक निरीक्षण किया, जिससे क्षेत्र में हलचल मच गई। उन्होंने यूरिया और डीएपी के स्टॉक की जांच की और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। नैनो यूरिया की बढ़ती लोकप्रियता के बीच, कलेक्टर ने किसानों में इसके उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मंडल कृषि अधिकारी को निर्देशित किया। यह कदम कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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कलेक्टर का खाद दुकानों पर औचक निरीक्षण, कालाबाजारी पर कड़ी नजर

कलेक्टर का निरीक्षण

शुक्रवार को, कलेक्टर ने पेब्बड़ नगरपालिका के किसान जंक्शन खाद दुकान, प्राथमिक कृषि सहकारी समिति कार्यालय और श्रीरंगापुर मंडल के गोदाम का औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी और किसान कल्याण तथा उर्वरक की उपलब्धता के मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए।


कलेक्टर ने दुकानों के बाहर प्रदर्शित खाद स्टॉक, दुकान के अंदर के स्टॉक और गोदाम में रखे उर्वरक की बारीकी से जांच की। उनका मुख्य ध्यान यूरिया और डीएपी (DAP) के स्टॉक का ऑनलाइन रिकॉर्ड से मिलान करना था, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या खाद की कमी का पता लगाया जा सके। इस दौरान, खाद दुकान के मालिक ने बताया कि 45 किलोग्राम यूरिया के बोरे की कीमत 266 रुपये है और नैनो यूरिया की एक कैन 265 रुपये में बेची जा रही है। नैनो यूरिया, जो फसलों के लिए अत्यधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है, किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।


इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उर्वरक की बिक्री एमआरपी (MRP) से अधिक कीमत पर की गई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद दी जाए और कृत्रिम कमी उत्पन्न करने से बचा जाए। इस प्रकार की कालाबाजारी किसानों को सबसे अधिक प्रभावित करती है और कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।


कलेक्टर ने मंडल कृषि अधिकारी को नैनो यूरिया के उपयोग के बारे में किसानों में जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया। नैनो यूरिया कम मात्रा में अधिक प्रभावी होती है और पारंपरिक यूरिया की तुलना में पर्यावरण पर कम प्रभाव डालती है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि मंडल कृषि अधिकारी समय-समय पर खाद दुकानों का औचक निरीक्षण करें और कीमतों पर कड़ी निगरानी रखें। यह कृषि विकास और किसानों के लाभ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।