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कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह 'कवि के मन से' का भव्य लोकार्पण

नई दिल्ली में 30 अप्रैल 2026 को कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह 'कवि के मन से' का भव्य लोकार्पण हुआ। इस समारोह में कई प्रमुख साहित्यकारों ने भाग लिया और वाजपेयी की रचनाओं की सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं की संख्या ने यह साबित किया कि कविता के प्रति रुचि अभी भी जीवित है। जानें इस आयोजन की विशेषताएं और साहित्य जगत की प्रमुख हस्तियों के विचार।
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कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह 'कवि के मन से' का भव्य लोकार्पण

लोकार्पण समारोह का आयोजन

सुशील कुमार शर्मा


नई दिल्ली: 30 अप्रैल 2026 को साहित्य अकादमी, नई दिल्ली में प्रसिद्ध कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह 'कवि के मन से' का भव्य लोकार्पण हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती ममता कालिया ने की। इस अवसर पर देश के प्रमुख रचनाकारों जैसे श्री बालस्वरूप राही, प्रताप सहगल, डॉ. ओम निश्चल, डॉ. संजीव कुमार और डॉ. रहमान मुसव्विर ने भी भाग लिया।


डॉ. ओम निश्चल ने इस संग्रह के बारे में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि वाजपेयी जी एक समर्पित रचनाकार हैं और उनकी कृतियों के बीच लंबा अंतराल होना निराशाजनक है। उन्होंने संग्रह की कई कविताओं की सराहना की और इसे महत्वपूर्ण बताया। वरिष्ठ साहित्यकार प्रताप सहगल ने छंदमुक्त और छंदबद्ध कविता के बीच के भेद पर चिंता व्यक्त की और कहा कि यह संग्रह इस बात का प्रमाण है कि सभी कविता विधाओं को समान महत्व मिलना चाहिए। डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि यदि इस संग्रह की कविताएं व्यापक रूप से पहुंचेंगी, तो समाज को लाभ होगा।



कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए गीतकार बालस्वरूप राही ने कहा कि आज की गोष्ठी ने यह साबित कर दिया है कि कविता के पाठक और श्रोता कम होने की बात केवल एक अफवाह है। राही जी ने डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी की ग़ज़ल 'टूटते लोगों को उम्मीदें नई देते हुए...' का पाठ भी किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में ममता कालिया ने इस कार्यक्रम को 'बंपर कार्यक्रम' बताते हुए डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी को कविता का 'अमिताभ बच्चन' कहा, जिससे सभागार में हंसी और तालियों की गूंज सुनाई दी। उन्होंने 'खंडित प्रतिमाएं' कविता का विशेष उल्लेख किया।


कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह 'कवि के मन से' का भव्य लोकार्पण


प्रसिद्ध शायर डॉ. रहमान मुसव्विर ने कार्यक्रम का प्रभावी संचालन किया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए श्रीमती ममता किरण और लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने सभी मुख्य अतिथियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और अपनी कविताएं भी सुनाईं। लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने कहा कि समाज को सही दिशा दिखाने की जिम्मेदारी रचनाकारों और संस्थाओं की है, और उन्हें इस दायित्व का एहसास होना चाहिए।


'किआन फाउंडेशन' द्वारा आयोजित इस लोकार्पण समारोह में कई प्रसिद्ध रचनाकारों ने कविता संग्रह की कविताओं का पाठ किया। श्रीमती इंदु निगम द्वारा एक गीत का पाठ श्रोताओं ने सराहा। श्री नरेश शांडिल्य, श्रीमती रेणु हुसैन, राजेंद्र निगम और डॉ. विभा नायक ने भी वाजपेयी की कविताओं का पाठ किया। समारोह में अनेक प्रतिष्ठित कवि, कथाकार और मीडियाकर्मी उपस्थित रहे। इस कविता संग्रह का प्रकाशन इंडिया नेट बुक्स ने किया है.