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कश्मीर में खामेनेई के निधन पर भड़का विरोध

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन ने कश्मीर में व्यापक विरोध को जन्म दिया है। सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, हाथों में खामेनेई के चित्र लिए हुए, और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इस घटना को धार्मिक भावनाओं और राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, जिससे भारतीय राजनीति पर भी प्रभाव पड़ सकता है। जानिए इस विरोध के पीछे की वजहें और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बारे में।
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कश्मीर में खामेनेई के निधन पर भड़का विरोध

कश्मीर में खामेनेई के निधन का प्रभाव


ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन का असर भारत में भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। कश्मीर घाटी में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, हाथों में खामेनेई के चित्र और पोस्टर लिए हुए, और 'खामेनेई जिंदाबाद' तथा 'अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे हैं।


खामेनेई के निधन पर कश्मीरी लोगों की प्रतिक्रिया

कश्मीर के निवासी खामेनेई के निधन पर विरोध जता रहे हैं, जो धार्मिक भावनाओं से प्रेरित माना जा रहा है। कुछ लोग खामेनेई को फिलिस्तीन का समर्थक मानते हैं, इसलिए उनका निधन फिलिस्तीनियों के खिलाफ एक बड़ा झटका माना जा रहा है।


खामेनेई की मौत पर कश्मीरी लोगों का गुस्सा

ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई ने अपने कार्यकाल में कई बार कश्मीर के मुद्दे पर समर्थन व्यक्त किया। शिया समुदाय के लोग उन्हें एक धार्मिक गुरु के रूप में मानते हैं और इस्लाम की एकता तथा शिया मुस्लिम समूह के प्रतीक के रूप में देखते हैं। इसीलिए कश्मीर के लोग उनके निधन की खबर को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।


अमेरिका और इजरायल ने खामेनेई के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' चलाया, जिसे शिया मुस्लिम समुदाय अपने खिलाफ मानता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन में खामेनेई के अलावा ईरान के 40 शीर्ष नेताओं की मौत की भी खबर है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है।


मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति

कश्मीर के लोग खामेनेई की मौत को केवल एक राजनीतिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि सामुदायिक भावनाओं के रूप में देख रहे हैं। इस कारण उनका गुस्सा और भी बढ़ गया है, और लोग इस घटना के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इसका असर भारतीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।


इजरायल के इस घटना से पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर गए थे, जो कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा समझौते और व्यापार को लेकर था। हालांकि, इसे कई लोग ईरान के खिलाफ एक कदम के रूप में देख रहे हैं। इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान कतर, जॉर्डन और दुबई को निशाना बना रहा है। कुल मिलाकर, मध्य पूर्व में अगले कुछ दिनों तक राहत की कोई संभावना नहीं दिखती।