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कांग्रेस अध्यक्ष का मोदी सरकार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार पर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 8 दिनों में तीन बार कीमतें बढ़ाई गई हैं और सवाल उठाया कि इस लूट का लाभ किसे मिल रहा है। खड़गे ने अंतर्राष्ट्रीय उदाहरणों के माध्यम से यह दर्शाया कि अन्य देशों ने अपनी जनता को राहत दी है, जबकि भारत में स्थिति अलग है। जानें उनके बयान और सरकार की नीतियों पर उनकी राय।
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कांग्रेस अध्यक्ष का मोदी सरकार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर हमला

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का विरोध


नई दिल्ली। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 8 दिनों में तीन बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। खड़गे ने सवाल उठाया कि, 'क्या भारत में कीमतें विदेशों की तुलना में सबसे कम हैं?' उन्होंने यह भी पूछा कि इस लूट का लाभ किसे मिल रहा है और सरकार इतनी समझौता क्यों कर रही है?


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खड़गे ने लिखा, 'पेट्रोल की कीमत अब ₹100 से पार हो गई है। जनता की कमाई पर किश्तों में लूट हो रही है। भाजपा का पेट केंद्रीय टैक्स से नहीं भर रहा है। जब अंतर्राष्ट्रीय कीमतें कम थीं, तब जनता को कोई राहत नहीं दी गई। चुनाव के समय सरकार सक्रिय हो जाती है और बाद में बलिदान का उपदेश देती है।'


उन्होंने आगे कहा कि, 'जब पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ, तब मोदी जी हमें यह कहकर सांत्वना दे रहे थे कि सब ठीक है, जबकि अन्य देशों ने अपनी जनता को राहत दी।'


खड़गे ने उदाहरण देते हुए बताया कि इटली ने ईंधन पर एक्साइज कटौती की, जिससे वहां की जनता को राहत मिली। ऑस्ट्रेलिया ने एक्साइज ड्यूटी में कमी की, जिससे पेट्रोल की कीमतें लगभग ₹17 प्रति लीटर कम हो गईं। जर्मनी ने भी तेल पर टैक्स कम किया, जिससे कीमतें ₹17 से ₹19 प्रति लीटर घट गईं। यूके ने घरों को £100 की सहायता दी और ईंधन तथा बिजली पर टैक्स में कटौती की। आयरलैंड के राहत पैकेज से पेट्रोल की कीमतें लगभग €0.15 प्रति लीटर और डीजल की कीमतें €0.20 प्रति लीटर कम हो गईं।


कांग्रेस अध्यक्ष ने अंत में कहा, 'पीएम नरेंद्र मोदी जी, बताइए, इस लूट का लाभ किसे मिल रहा है? इस सरकार में नेतृत्व का संकट वास्तविक है, और 140 करोड़ भारतीय अब यह समझ चुके हैं।'