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कांग्रेस ने पीएम मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया

कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस पेश किया है। इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पीएम ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी सांसदों के वोट और उनके इरादों पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि यह नियमों का उल्लंघन है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और विशेषाधिकार हनन के बारे में।
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कांग्रेस ने पीएम मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया

विपक्षी सांसदों के इरादों पर उठाए सवाल


कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस पेश किया है। पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि पीएम ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी सांसदों के वोट और उनके इरादों पर सवाल उठाए। यह नियमों का उल्लंघन है।


पीएम ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए

वेणुगोपाल ने बताया कि पीएम ने लगभग 29 मिनट के अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण बिल को रोकने का आरोप लगाया और सांसदों के वोटिंग पैटर्न पर सवाल उठाए। उन्होंने इस मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजने और पीएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।


कांग्रेस नेता का बयान

कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि पीएम का राष्ट्र के नाम संबोधन आमतौर पर देश को एकजुट करने और विश्वास बढ़ाने के लिए होता है, लेकिन इस बार उन्होंने कांग्रेस पर 59 बार निशाना साधा। इसे पीएम के रिकॉर्ड पर एक और दाग माना जाएगा।


पीएम का संबोधन

पीएम नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को देश को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके जैसे विपक्षी दल भ्रूणहत्या के गुनहगार हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी।


महिला आरक्षण बिल का मामला

दरअसल, लोकसभा में 17 अप्रैल को महिला आरक्षण से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका था। इस बिल में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पास करने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी।


विशेषाधिकार हनन क्या है?

संसद के सांसदों और समितियों को कुछ विशेष अधिकार दिए जाते हैं ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने कार्य कर सकें। यदि कोई सांसद या बाहरी व्यक्ति इन अधिकारों में हस्तक्षेप करता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। ऐसे मामलों में कोई भी सांसद सदन में प्रस्ताव ला सकता है और कार्रवाई की मांग कर सकता है।