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कानपुर कलेक्ट्रेट में टाइपिंग टेस्ट में असफलता पर तीन कर्मचारियों का पदावनन

कानपुर कलेक्ट्रेट में तीन सरकारी कर्मचारियों को टाइपिंग परीक्षा में असफलता के कारण चपरासी के पद पर पदावनत किया गया है। जिलाधिकारी ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें पहले वेतन रोकने का मौका दिया था, लेकिन दूसरी बार भी असफल रहने पर उन्हें अपने पद से हटा दिया गया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और प्रशासन की कार्रवाई का औचित्य।
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कानपुर कलेक्ट्रेट में टाइपिंग टेस्ट में असफलता पर तीन कर्मचारियों का पदावनन

कानपुर कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों की टाइपिंग परीक्षा का मामला

तीन सरकारी कर्मचारियों को कानपुर कलेक्ट्रेट में टाइपिंग परीक्षा में असफल रहने के कारण अपने पद से हटा दिया गया है। ये कर्मचारी, अमित कुमार यादव, नेहा श्रीवास्तव और प्रेमनाथ यादव, दूसरी बार भी परीक्षा में सफल नहीं हो सके, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें क्लर्क से चपरासी के पद पर पदावनत किया गया।


जिलाधिकारी की सख्त कार्रवाई

जिलाधिकारी ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए तीनों कर्मचारियों के डिमोशन के आदेश जारी किए। पहले प्रयास में असफल रहने पर उनकी सैलरी और इंक्रीमेंट रोक दी गई थी, लेकिन दूसरी बार भी विफल रहने पर उन्हें चपरासी बना दिया गया। सरकारी नियमों के अनुसार, जूनियर क्लर्क को एक मिनट में कम से कम 25 शब्द टाइप करने की आवश्यकता होती है, जो वे पूरा नहीं कर सके।


पहले प्रयास में सुधार का मौका

पहली बार असफल होने पर उन्हें सीधे सजा नहीं दी गई थी, बल्कि सुधार का अवसर दिया गया था। लेकिन जब 2025 में पुनः परीक्षा आयोजित की गई, तो परिणाम वही रहा। तीनों कर्मचारी आवश्यक गति तक नहीं पहुंच सके।


डीएम का कड़ा निर्णय

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा निर्णय लिया। प्रेमनाथ यादव डीएम कैंप कार्यालय में कार्यरत थे, जबकि नेहा और अमित कलेक्ट्रेट में जूनियर क्लर्क के रूप में कार्य कर रहे थे।


प्रशासन की कार्रवाई का औचित्य

प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है। यदि कोई कर्मचारी अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पाता है, तो इससे कार्य प्रभावित होता है। कलेक्ट्रेट जैसे कार्यालयों में टाइपिंग दक्षता की कमी से कामकाज पर सीधा असर पड़ता है। इस कारण विभाग को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।